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वैज्ञानिक सलाह-धान में इस कीड़े का प्रकोप हो तो उपाये ये अपनाए।

धान का कीट - लीफ़ फोल्डर या धान का छिलका,पत्ती लपेटक।
डॉ गजेंद्र चन्द्राकर ,वरिष्ठ वैज्ञानिक
एवं अजय गुप्ता MSc (Ag) Ento final year IGKV



यह क्या करता है
लीफ़ फोल्डर कैटरपिलर अपने चारों ओर एक धान की पत्ती को मोड़ते हैं और पत्ती के मार्जिन को रेशम की किस्में के साथ जोड़ते हैं।
वे तह पत्ती के अंदर फीड करते हैं जो ब्लेड पर अनुदैर्ध्य सफेद और पारदर्शी धारियां बनाती हैं।
ऐसा क्यों और कहाँ होता है
उर्वरक का भारी उपयोग कीट के तेजी से गुणा को प्रोत्साहित करता है।क्षेत्र की उच्च आद्रता और छायादार क्षेत्र, साथ ही धान के खेतों और आसपास की सीमाओं से घास के खरपतवारों की उपस्थिति कीट के विकास का पक्ष लेती है।



सिंचाई प्रणाली के साथ विस्तारित धान क्षेत्र,कई धान फसल और कीटनाशक प्रेरित पुनरुत्थान कीट की बहुतायत महत्वपूर्ण कारक हैं।

धान के टुकड़े सभी धान के वातावरण में होते हैं और बरसात के मौसम में अधिक प्रचुर मात्रा में होते हैं।वे आमतौर पर छायादार क्षेत्रों और उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ भारी निषेचित होते हैं।उष्णकटिबंधीय धान क्षेत्रों में,वे साल भर सक्रिय रहते हैं,जबकि समसीतोष्ण क्षेत्रों में वे मई से अक्टूबर तक सक्रिय रहते हैं।वयस्क निशाचर होते हैं और दिन के दौरान,वे भविष्यवाणी से बचने के लिए छाया में रहते हैं।परेशान होने पर पतंगे कम दूरी तक उड़ते हैं।

कीट का पहचान
*अंडा-चपटा, आकार में अंडाकार,सफेद रंग या पीला
*लार्वा-ग्रीनीश,परभासी
*वयस्क-मोथ केंद्र में कई अंधेरे लहराती लाईनों और पंखों के मार्जिन पर भी अंधेरे बैंड के साथ भूरा होता हैं।
क्षति के लक्षण-
1.पत्तियां लंबे समय तक चलती हैं और लार्वा अंदर रहता है।
2.लार्वा पत्तियों के हरे उत्तकों को स्क्रैप करता है, सफेद और शुष्क हो जाता है।
3.गंभीर संक्रमण के दौरान पूरा क्षेत्र झुलसा हुआ दिखाई देता है।
4.दायर की बीमार उपस्थिति।
5.फोड़ा के साथ अंदर लार्वा के साथ मुड़ा हुआ पत्ता।
6.क्षतिग्रस्त पत्तियों पर अनुदैर्ध्य और पारदर्शी सफेद धारियां।
7.पत्ती की युक्तियाँ कभी-कभी पत्ती के बेसल हिस्से तक तेज हो जाते हैं।

*ETL- वानस्पतिक अवस्था मे 10%पत्ती की क्षति और 5%पत्ती के झड़ने का फूल पर नुकसान*
*@ प्रति टीलर 1 लार्वा*

नियंत्रण के उपाय-

*कृषिगत क्रियाएँ*
1.एक अलग फसल, या परती अवधि के साथ धान का पालन करें।
2.रौनक से बचें।
3.खेतों और सीमाओं से घास के खरपतवार निकालें।
4.रोपण का घनत्व कम करें।
5.संतुलित उर्वरक दरों का उपयोग करें।

*जैविक नियंत्रण*
1.अंडा परजीवीटाईड *टाईकोग्रामा* *चिलोनिस* @के 5-6 रिलीज@1,00,000 वयस्क परजीवी प्रति हेक्टेयर रोपण के 15 दिन बाद शुरू होते हैं,एक फसल के मौसम में प्रभावी एवं किफायती होते हैं।
2. जैविक नियंत्रण में 
एंटोमो पैथोजेनिक बैक्टीरिया जैसे कि "बैसिलस थुरिंजिनैसिस" बर्लिनर और एक ग्रैनुलोसिस वायरस धान की पत्ती फोल्डर लार्वा की मृत्यु का कारण बनता है।

रासायनिक नियंत्रण-
1.NSKE 5 %या कार्बारिल 50 WP 1 kg या क्लोरपायरिफास 1250 मिली प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
2. निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक कख स्प्रे करें-
-फोसालोन 35EC 1500 मिली/हेक्टेयर
-एसिफेट 75%SP 666 - 1000मिली/हे.
-ट्रायजोफास 40%EC 625 -1250मिली/हे.
-फिप्रोनिल 80%WG 50- 62.2 ग्राम/हे.
-फ्लुबेंडियामाईड 29%WG 125-250 ग्राम/हे.
-क्लोरेंटानिलिप्रोएल 18.5 SC 159 ग्राम/हे.
-थियोमेथोक्साम 25%WG 100 ग्राम/हे.।


Comments

Unknown said…
Sir cg krishi yantra per subsidy kai le