आजोला (Azolla) का धान की फसल में उपयोग व उत्पादन विधि 🌱 आजोला क्या है? आजोला एक छोटी जलफर्न (floating fern) है जो पानी की सतह पर तैरती है। इसमें Anabaena नामक नीला-हरित शैवाल रहता है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करता है। इसलिए यह धान में जैव उर्वरक (Biofertilizer) के रूप में बहुत उपयोगी है। 🌾 धान की फसल में आजोला का उपयोग 1. हरी खाद के रूप में धान रोपाई से पहले खेत में आजोला बढ़ाकर मिट्टी में मिला दें। इससे नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। 2. रोपाई के बाद खेत में धान रोपाई के 7–10 दिन बाद पानी भरे खेत में आजोला छोड़ें। यह फैलकर सतह ढक देता है। लाभ ✅ 20–30 किलो नाइट्रोजन/हेक्टेयर तक उपलब्ध करा सकता है ✅ यूरिया की बचत ✅ खरपतवार कम उगते हैं ✅ नमी संरक्षण ✅ मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है ✅ उपज में सुधार आजोला उत्पादन विधि (नर्सरी/तालाब में) गड्ढा/बेड विधि आकार: 2 मीटर × 1 मीटर × 0.2 मीटर गड्ढा सामग्री : ▪️प्लास्टिक शीट ▪️10–15 किलो बारीक मिट्टी ▪️2–5 किलो गोबर खाद ▪️100 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट ▪️पानी 5–10 सेमी ▪️500 ग्राम से 1 किलो आजोला बीज कल्चर तरीका : ▪️गड्ढा बनाकर प्लास्टिक बिछाएं। ▪️मिट्...
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