नील हरित शैवाल उत्पादन तकनीक धान के खेत में नील हरित शैवाल का उपच नील हरित शैवाल के उपयोग से लाभ नील हरित शैवाल उत्पादन की विधि उत्पादन में ध्यान रखने योग्य बातें नील हरित शैवाल कल्चर के उत्पादन की ग्रामीण तकनीक नील हरित शैवाल जलीय पौधों का एक विशेष समूह होता है। इसे साइनो बैक्टीरिया भी कहा जाता है। यह एक कोशिकीय जीवाणु है और शैवाल के आकार का होता है, इसलिए इसे नील हरित शैवाल भी कहते हैं। इस जीवाणु को धान की फसल के लिए वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को भूमि में संस्थापित कराने के उद्देश्य से उपयोग में लाया जाता है। नील हरित शैवाल प्रकाश संश्लेषण से ऊर्जा ग्रहण करके वायुमंडलीय नाइट्रोजन का भूमि में स्थिरीकरण करता है। यह एक स्वतंत्र रूप से जीवनयापन करने वाला जीवाणु होता है, जिसे दलहनी फसलों की भाति ऊर्जा के लिए धान के पौधे पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। धान के खेत में चूंकि सदैव पानी भरा रहता है, इसलिए नील हरित शैवाल की वृद्धि एवं विकास के लिए अनुकूल स्थितियां विद्यमान रहती हैं। नील हरित शैवाल द्वारा नाइट्रोजन का स्थिरीकरण एक विशिष्ट कोशिका द्वारा किया जाता है। इसके उपयोग से 20 से 40 कि.ग्रा....
फॉस्फोरस और जिंक सल्फेट को साथ में क्यों नहीं मिला सकते, साथ मिलने से घोल फट जाता हे , तत्व स्थिर हो जाता हे जिसका पौधे उपयोग नहीं कर पाते , तत्वों को पुनः उपलब्ध अवस्था में लाने के लिए ऑर्गेनिक कार्बन का उपयोग करते हे * जैसे एग्री सर्च इंडिया प्रा ली का एग्रीप्लेस ओ ए (Agriplex-OA) *। * एग्रीप्लेस ओ ए में 27% ऑर्गेनिक कार्बन, ओर कैल्शियम 5.5% होता हे । * जो मृदा को सुधारने के साथ ही सूक्ष्म जगत एवं पौधे के लिए भोजन का कार्य करता हे। * जितने भी तत्व मिट्टी में उपलब्ध हे उन्हें पुनः गतिशील बनाता हे, * जिससे मिट्टी में दिए गए खाद एवं उर्वरक की उपयोगिता बढ़ती हे। 📌अतः किसान भाई जिंक एवं फास्फेटिक उर्वरक जैसे 12,32,16 या डी ए पी 12,61,00 &,00,52,34 & नैनो डी ए पी & 19,19,19 का उपयोग साथ में न करे। फास्फेटिक उर्वरक के साथ जी सिर्फ जिंक सल्फेट नि नहीं बल्कि फेरस सल्फेट, कैल्शियम नाइट्रेट, कुछ सल्फेटिक उर्वरकों को छोड़कर किसी भी सल्फेट फॉर्मूलेशन वाले सल्फेटिक उर्वरक को फॉस्फोरस के साथ नहीं देना हे। 📌फॉस्फोरस के साथ आप चिलीटेड(EDTA) फर्टिलाइजर का उपयोग कर ...