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Showing posts from 2025
फॉस्फोरस और जिंक सल्फेट को साथ में क्यों नहीं मिला सकते, साथ मिलने से घोल फट जाता हे , तत्व स्थिर हो जाता हे जिसका पौधे उपयोग नहीं कर पाते , तत्वों को पुनः उपलब्ध अवस्था में लाने के लिए ऑर्गेनिक कार्बन का उपयोग करते हे * जैसे एग्री सर्च इंडिया प्रा ली का एग्रीप्लेस ओ ए (Agriplex-OA) *। * एग्रीप्लेस ओ ए में 27% ऑर्गेनिक कार्बन, ओर कैल्शियम 5.5% होता हे । * जो मृदा को सुधारने के साथ ही सूक्ष्म जगत एवं पौधे के लिए भोजन का कार्य करता हे। * जितने भी तत्व मिट्टी में उपलब्ध हे उन्हें पुनः गतिशील बनाता हे, * जिससे मिट्टी में दिए गए खाद एवं उर्वरक की उपयोगिता बढ़ती हे। 📌अतः किसान भाई जिंक एवं फास्फेटिक उर्वरक जैसे 12,32,16 या डी ए पी 12,61,00 &,00,52,34 & नैनो डी ए पी & 19,19,19 का उपयोग साथ में न करे। फास्फेटिक उर्वरक के साथ जी सिर्फ जिंक सल्फेट नि नहीं बल्कि फेरस सल्फेट, कैल्शियम नाइट्रेट, कुछ सल्फेटिक उर्वरकों को छोड़कर किसी भी सल्फेट फॉर्मूलेशन वाले सल्फेटिक उर्वरक को फॉस्फोरस के साथ नहीं देना हे। 📌फॉस्फोरस के साथ आप चिलीटेड(EDTA) फर्टिलाइजर का उपयोग कर ...

हाइब्रिड बीज के बारे में सम्पूर्ण जानें:

  हाइब्रिड बीज के बारे में सम्पूर्ण जानें हाइब्रिड फसल विकास एक ऐसी तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग लेकिन मिलने-जुलने वाले पौधों को आपस में मिलाया जाता है। ताकि उनकी संतान में दोनों पौधों के अच्छे गुण आएं। ये #हाइब्रिड फसलें आमतौर पर अपने माता-पिता (जनक पौधों) से बेहतर होती हैं, जैसे कि ज्यादा फसल देना, बीमारियों से बचना या सूखा सहन करना। इसे आसान शब्दों में कहें तो, यह दो अच्छे पौधों के गुणों को मिलाकर एक सुपर पौधा बनाने की प्रक्रिया है! हाइब्रिड बीज कैसे बनते है:- 1. दो अच्छे पौधों का चयन      वैज्ञानिक या बीज विशेषज्ञ दो ऐसे पौधों को चुनते हैं जिनमें अलग-अलग अच्छे गुण हों। जैसे, एक पौधा ज्यादा फसल देता हो और दूसरा बीमारियों से लड़े। इन दोनों को मिलाकर एक नया पौधा बनाया जाता है। 2. पर-परागण (क्रॉस-पॉलिनेशन)      एक पौधे के पराग (फूल का नर हिस्सा) को दूसरे पौधे के मादा हिस्से में डाला जाता है। यह काम हाथ से या खास तकनीकों से किया जाता है। ताकि सही मिश्रण हो। 3. संकर बीज बनाना      इस मिलन से जो बीज बनते हैं, वे हाइब्रिड (संकर...

अगर आप धान की खेती में MOP डाले तो उसके फायदे:

💁🏼‍♀️अगर आप धान की खेती में MOP डाले तो उसके फायदे:  1. जड़ और तनों की मजबूती —  पोटाश पौधों की जड़ों को मजबूत करता है और तने को मोटा व सीधा खड़ा रहने में मदद करता है।  इससे धान की फसल गिरने (lodging) से बचती है।  2. बीमारी और कीट प्रतिरोधक क्षमता —  पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।  धान को झुलसा, धब्बा रोग, ब्लास्ट जैसी बीमारियों और कीटों के हमले से बचाने में सहायक है।  3. धान की बालियों और दानों की गुणवत्ता —  पोटाश डालने से दाने भरपूर और अच्छे आकार के होते हैं।  दाने में चमक व वजन बढ़ता है, जिससे मंडी में अच्छा भाव मिलता है।  4. धान की उपज में वृद्धि —  पोटाश पौधे में प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को तेज करता है।   इससे पौधे में अधिक ऊर्जा बनती है और उपज में 15-20% तक बढ़ोतरी हो सकती है।  5. पानी और पोषक तत्वों का संतुलन —  धान की फसल लगातार पानी में रहती है, पोटाश पौधे के अंदर पानी का संतुलन बनाए रखता है।  इससे सूखे या ज्यादा पानी की स्थिति में पौधे को सहनशीलता मिलती है। 💁🏼‍♀️धान में MOP (पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ —  • 20–30 किलो MOP (पोटाश) प्रत...

एनपीके 00:50 क्या काम करता है आइये जानते है?

एनपीके 00:50 (Mono Potassium Phosphate - MKP 00:52:34 जैसा ही काम करता है) धान की फसल में पोटाश और फॉस्फोरस की कमी पूरी करने के लिए बहुत उपयोगी होता है। ✅ धान में NPK 00:50 का स्प्रे कब करें 1. बाली निकलने से पहले (Pre-Flowering Stage): धान में झिल्ली (Booting stage) से ठीक पहले 1 स्प्रे करें। इससे दाने अच्छे से भरते हैं और झड़ने की समस्या कम होती है। 2. दूधिया अवस्था (Milky stage): बाली निकलने के 10–12 दिन बाद दूसरा स्प्रे करें। इससे दाने का भराव और चमक अच्छी होती है। ✅ कैसे स्प्रे करें मात्रा: 1 एकड़ में 75–100 ग्राम NPK 00:50 को 15–20 लीटर पानी में घोलें (पंप टैंक के लिए)। पूरे एकड़ में 200 लीटर पानी के साथ 700–800 ग्राम दवा का प्रयोग करें। स्प्रे का समय : सुबह 8 से 10 बजे तक या शाम 4 बजे के बाद ही करें। तेज धूप या बारिश के समय स्प्रे न करें। मिक्सिंग : इसे अन्य खाद/कीटनाशक/फफूंदनाशी के साथ मिलाने से पहले compatibility check जरूर करें। हमेशा NPK 00:50 को अलग घोल बनाकर टैंक में डालें। ❌ कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए 1. बहुत ज्यादा मात्रा का प्रयोग न करें, वरना पत्तियां झुलस सकती हैं 2...

सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) कैसे बनता है

 सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) कैसे बनता है:- सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) एक ऐसा खाद है। जो फसलों को फॉस्फोरस देता है। फॉस्फोरस पौधों की जड़ों को मजबूत करता है और उनकी बढ़ोतरी में मदद करता है। 1. कच्चा माल: फॉस्फेट का पत्थर ये एक खास तरह का पत्थर होता है, जिसमें फॉस्फोरस भरा होता है। इसे खदान से निकालकर बारीक-बारीक पीस लिया जाता है, जैसे आटा चक्की में पिसता है। ऐसा करने से ये पाउडर आसानी से तेजाब के साथ मिल जाता है। 2. पत्थर को तेजाब के साथ मिलाना पिसे हुए पत्थर को सल्फ्यूरिक तेजाब (एक रसायन) के साथ मिलाते हैं। ये काम बड़े मिक्सर में होता है। इस मिलावट से दो चीजें बनती हैं: मोनोकैल्शियम फॉस्फेट: ये फॉस्फोरस देता है, जो पौधों की जड़ों और फूलों के लिए जरूरी है। जिप्सम: ये मिट्टी को कैल्शियम और गंधक (सल्फर) देता है, जो मिट्टी और पौधों को ताकत देता है। इस दौरान थोड़ी गर्मी निकलती है, और इसे सावधानी से किया जाता है। 3. मिश्रण को पकने देना तेजाब और पत्थर के मिलने के बाद जो मिश्रण बनता है, उसे 2 से 4 हफ्तों तक रखा जाता है। इसे "पकने" देना कहते हैं, जैसे दही जमाने के लिए रखते हैं। इस दौरान म...

डायमोनियम फॉस्फेट (DAP) खाद कैसे बनती है, इसे हम आसान और देसी भाषा में समझते हैं, ताकि हमारे किसान भाई इसे अच्छे से समझ सकें।

  डायमोनियम फॉस्फेट (DAP) खाद कैसे बनती है, इसे हम आसान और देसी भाषा में समझते हैं, ताकि हमारे किसान भाई इसे अच्छे से समझ सकें।  #DAP खाद फसलों को ताकत देने के लिए बहुत अच्छी होती है, क्योंकि इसमें #नाइट्रोजन और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता है। 1.पत्थर से #फॉस्फोरिक एसिड बनाना    - सबसे पहले एक खास तरह का पत्थर लिया जाता है, जिसे फॉस्फेट चट्टान कहते हैं। ये पत्थर खदानों से निकाला जाता है।    - इस पत्थर को #सल्फ्यूरिक एसिड (एक तरह का तेजाब) के साथ मिलाया जाता है। इससे फॉस्फोरिक एसिड बनता है, जो DAP का मुख्य हिस्सा है। साथ में जिप्सम नाम का एक बेकार पदार्थ भी निकलता है, जिसे अलग कर लिया जाता है।    - अब इस फॉस्फोरिक एसिड को गाढ़ा किया जाता है, ताकि ये DAP बनाने के लिए तैयार हो जाए। 2.अमोनिया तैयार करना    - DAP बनाने के लिए #अमोनिया गैस चाहिए। ये गैस हवा में मौजूद नाइट्रोजन और प्राकृतिक गैस से बनाई जाती है।     - इसे बनाने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों में गर्मी और दबाव का इस्तेमाल होता है। फिर अमोनिया को ठंडा करके तरल रूप में र...

लीफ ब्लास्ट

  #धान का #लीफ #ब्लास्ट रोग:- धान की फसल में लगने वाले फफूंदी जनक रोगों के लिए सही समय जब मौसम में अत्यधिक नमी हो, रात को ठंड और दिन में गर्मी हो, ओस गिर रही हो, खेत में पानी भरा रहा हो और लगातार बारिश हो रही हो तो फुफंदी जनक रोगों का प्रकोप अधिक रहता है। यह रोग पौधे की में नर्सरी से शुरू होकर दाना बाहर आने तक कभी भी आ सकता है। यह हवा, पानी, और मिट्टी सभी से फैलता है। यह रोग बहुत तेजी से फैलता है। यह फसल को हर स्टेज में खत्म करने की क्षमता रखता है। इसमें पत्तियों में नाव के आकार के धब्बे हो जाते हैं। जो बीच में सफेद होते हैं। और किनारों से हल्के बुरे दिखाई देते हैं।    ब्लास्ट रोग की रोकथाम  #आइसोप्रोथियोलेन (#Isoprothiolane) 40%EC की 400m मात्रा प्रति एकड़, #टेबुकोनाज़ोल (#Tebuconazole) 25.9%Ec की 250ml मात्रा प्रति एकड़, कसुगामाइसिन (#Kasugamycin) 3%sl ki 400ml मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें। इसमें कोई भी दवा का प्रयोग करने पर सिलिकॉन बेस्ड स्प्रेड (स्टिकर) अवश्य मिलाना चाहिए। 

प्लांट ग्रोथ प्रमोटर

प्लांट ग्रोथ प्रमोटर ह्यूमिक एसिड (humic acid) #ह्यूमिक #एसिड सबसे बढ़िया प्रमोटर होता है इसको उपयोग आप कितना भी कर सकते हैं। यह आप के पौधे को स्वस्थ रखने और मिट्टी को अच्छा बनाने में सहायता करता है। यह आपकी फसल को हरा भरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीवीड एक्सट्रैक्ट (seaweed extract) #सीवीड समुद्री शैवाल का रस होता है। इसमें कम धूप में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता होती है। क्योंकि यह शैवाल समुद्र के अंदर कम प्रकाश में पूरे विकसित होते हैं। इसलिए ठंड में इनका इस्तेमाल करना चाहिए। जब धूप कम हो सुबह या शाम के समय इनका प्रयोग करें। गर्मी में इनका प्रभाव अच्छा नहीं होता। इफको कंपनी की सागरिका और पाई की बायोविटा में सीविड होता है। ऑक्सिन हार्मोन(auxin hormon) #ऑक्सिन #हार्मोन का इस्तेमाल सभी फसलों पर कर सकते हैं।इसकी मात्रा 1ml/5लीटर पानी में लेनी है। इसको स्प्रे शाम के समय करना चाहिए। इसका इस्तेमाल आप अपनी फसलों पर बार-बार कर सकते हैं। दो सप्रे के बीच कम से कम 30 दिन का अंतर होना चाहिए। बायर कंपनी की प्लेनोफिक्स एक ऑक्सिन हारमोन है। जिबर्लिक एसिड (gibberlic acid) #जिब्रेलिक #ए...

फसलों में उर्वरक की जरूरत की गणना कैसे करें: किसानों के लिए आसान भाषा में

  फसलों में उर्वरक की जरूरत की गणना कैसे करें: किसानों के लिए आसान भाषा में फसलों को सही मात्रा में उर्वरक (खाद) देना बहुत जरूरी है। इससे फसल अच्छी होती है, पैसा बर्बाद नहीं होता और मिट्टी भी स्वस्थ रहती है। उर्वरक की मात्रा फसल की जरूरत, मिट्टी की हालत और उर्वरक में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर तय की जाती है। आइए इसे आसान तरीके से समझें: फसल को कितने पोषक तत्व चाहिए? (प्रति हेक्टेयर) नाइट्रोजन (N): 150 किलो   फॉस्फोरस (P₂O₅): 60 किलो   पोटैशियम (K₂O): 40 किलो आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले उर्वरक यूरिया: इसमें 46% नाइट्रोजन होता है।   DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट): इसमें 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है।   MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश): इसमें 60% पोटैशियम होता है। उर्वरक की मात्रा कैसे निकालें? DAP से फॉस्फोरस की जरूरत   फसल को 60 किलो #फॉस्फोरस चाहिए।   DAP में 46% फॉस्फोरस है, तो:60 ÷ 46 × 100 = 130 किलो DAP   इससे नाइट्रोजन भी मिलेगा:130 × 18 ÷ 100 = 23.4 किलो नाइट्रोजन यूरिया से नाइट्रोजन की जरूरत    फसल को...

टॉप 10 मुख्य जैविक उर्वरक:-

  टॉप 10 मुख्य जैविक उर्वरक टॉप 10 जैव उर्वरक: किसान भाइयों के लिए आसान भाषा में जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइज़र) मिट्टी और फसलों को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक तरीके हैं। ये छोटे-छोटे जीव या कवक होते हैं जो मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाते हैं और पौधों को मजबूत बनाते हैं। #राइजोबियम   ये छोटे जीव मटर, चना, मूंग, उड़द जैसी फलीदार फसलों की जड़ों में रहते हैं।   ये हवा से नाइट्रोजन लेकर पौधों को देते हैं, जिससे फसल को ताकत मिलती है।   इस्तेमाल: इनको बीज बोने से पहले बीजों पर लगाएं। #एजोस्पिरिलम   ये जड़ों को मजबूत बनाता है और हवा से नाइट्रोजन पकड़कर मिट्टी में डालता है।   धान, गेहूं, मक्का जैसी फसलों के लिए अच्छा है।   इस्तेमाल: इसे मिट्टी में या बीज के साथ मिलाएं। #एजोटोबैक्टर   ये मिट्टी में रहकर हवा से नाइट्रोजन लेता है और पौधों को देता है।   गन्ना, बाजरा, सब्जियों के लिए उपयोगी।   इस्तेमाल: मिट्टी में मिलाएं या खाद के साथ डालें। #फॉस्फोबैक्टीरिया   मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस को पौधों के लिए...

यूरिया कैसे बनता है।

  यूरिया कैसे बनता है। यूरिया एक ऐसा उर्वरक है जो किसानों के लिए बहुत ज़रूरी है। यह फसलों को नाइट्रोजन देता है, जिससे पौधों की पत्तियाँ और तने मज़बूत होते हैं और पैदावार बढ़ती है। आइए, बहुत ही आसान भाषा में समझें कि यूरिया कैसे बनता है, ताकि हर किसान इसे समझ सके। यूरिया कैसे बनता है? यूरिया कारखानों में बनाया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया को चरणों में समझते हैं: 1. पहला चरण: अमोनिया बनाना    - सबसे पहले प्राकृतिक गैस (जैसे मीथेन) से हाइड्रोजन निकाला जाता है। यह गैस ज़मीन से मिलती है।    - फिर इस हाइड्रोजन को हवा में मौजूद नाइट्रोजन के साथ मिलाया जाता है।     - दोनों को मिलाने से अमोनिया (NH3) बनता है। यह एक तरह का रसायन है, जो यूरिया बनाने का मुख्य हिस्सा है। 2. दूसरा चरण: यूरिया बनाना    - अब अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के साथ मिलाया जाता है। यह गैस कारखानों में बनती है या हवा से ली जाती है।    - इस मिश्रण को बहुत ज़्यादा गर्मी (उच्च तापमान) और दबाव में रखा जाता है। इससे यूरिया के छोटे-छोटे क्रिस्टल बनते हैं। 3. त...

डीएपी और एनपीके में अंतर:

डीएपी और एनपीके में अंतर:- डीएपी क्या है और यह कैसे मदद करता है?   #डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) एक खाद है जिसमें #फॉस्फोरस बहुत ज्यादा होता है। इसका लेबल 18-46-0 होता है, यानी इसमें 18% #नाइट्रोजन, 46% #फॉस्फोरस और 0% #पोटेशियम होता है। फॉस्फोरस पौधों की जड़ों को मजबूत और गहरा बनाने में मदद करता है, खासकर जब पौधा छोटा होता है। मजबूत जड़ें पौधे को पानी और अन्य पोषक तत्व आसानी से लेने में मदद करती हैं। इससे पौधा शुरू में तेजी से और एकसमान बढ़ता है। डीएपी मिट्टी में अमोनियम और फॉस्फेट भी देता है, जो पोषक तत्वों को बेहतर बनाता है और मिट्टी का पीएच संतुलित रखता है। इससे छोटे पौधों को और ताकत मिलती है। #एनपीके क्या है और यह कैसे काम करता है?   एनपीके एक ऐसी खाद है जिसमें तीन पोषक तत्व होते हैं: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम।   नाइट्रोजन: पौधों की पत्तियों को हरा-भरा और घना बनाता है।   फॉस्फोरस: जड़ों और तने को मजबूत करता है।   पोटेशियम: पौधों को बीमारियों और मुश्किल हालात (जैसे सूखा या गर्मी) से लड़ने की ताकत देता है।   एनपीके तब सबस...

कृषि स्थाई समिति फिंगेश्वर की बैठक में 3 जलाशयों का पट्टा आबंटन हेतु प्रस्ताव पारित किया गया।

 कृषि स्थाई समिति फिंगेश्वर की बैठक में 3 जलाशयों का पट्टा आबंटन हेतु प्रस्ताव पारित किया गया। आज दिनांक 17.07.2025 को कार्या. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखण्ड- फिंगेश्वर जिला गरियाबंद में कृषि स्थाई समिति की बैठक सभापति श्री मंजू कमलेश साहू की अध्यक्षता में आयोजित की गई। उक्त बैठक में कृषि के संवर्ग विभाग (मत्स्य विभाग, उधानिकी विभाग, पशु पालन विभाग) के अधिकारी कर्मचारियों ने अपनी सहभागिता की एवं अपने विभाग द्वारा आयोजित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी एवं मत्स्य विभाग द्वारा 3 जलाशय जोगीडीपा जलाशय, बोरिद जलाशय एवं सरकड़ा जलाशयों को 10 वर्षीय पट्टा आबंटन का प्रस्ताव पारित किया गया।  जिसमें सरकड़ा जलाशय रकबा 10.50 हे. को प्राथमिकता एवं पात्रता अनुसार जय मां सम्लाई मछुआ सहकारी समिति सरकड़ा एवं बोरिद जलाशय रकबा 17.81 हे. को प्राथमिकता एवं पात्रता अनुसार जय डोगेश्वर मत्स्य पालन सहकारी समिति बोरिद का प्रस्ताव पारित किया गया। एवं जोगीडीपा जलाशय रकबा 51.70 हैं को प्राथमिकता एवं प्राथमिकता के आधार पर जल क्षत्री मछुआ सहकारी समिति परसदा कला का प्रस्ताव पारित किया गया। उपरोक्त बैठक में...

धान मे आ रही है डबल जड़

धान मे आ रही है डबल जड़  Planofix 250ml /acer + nitrobenzene 3kg/acer + 3 kg sulphur urea me milakar chidkao kre bhut achha result hai