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बीजोपचार:-बोने से पहले बीजों को पहनाएँ सुरक्षा कवच

बीजोपचार:-बोने से पहले बीजों को पहनाएँ सुरक्षा कवच किसी भी फसल के उत्पादन के लिए बीज एक महँगा आदान (इनपुट) है। फसल उत्पादन की कुल लागत का लगभग 20 से 40 प्र.श. तक अकेले बीज पर खर्च हो जाता है। अपनी फसल के लिए स्वयं बीज तैयार करने वाले किसान भी अगली फसल के बीज की तैयारी पहले की फसल कटने केपहले से ही करने लगते हैं।  बीज के लिए सबसे अच्छे खेत की फसल (जिसमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व दिए गए हों, कीड़े और रोगों से पूरी सुरक्षा की गई हो) को पहले से ही सुरक्षित कर लिया जाता है। इस खेत की फसल की अलग से कटाई-गहाई कर उसके दानों कोछन्ना लगाकर, बारीक दाने अलग कर रखा जाता है। कीड़ों, रोगों, चूहों आदि से इन्हें बचाने के लिए लोहे या मिट्टी की कोठियों में नमी रहित स्थान पर रखा जाता है। बीज उत्पादक संस्थाओं से खरीदा गया बीज तो बहुत महँगा होता है। छोटे किसान आवश्यकतानुसार मात्रा मुश्किल से खरीद पाते हैं। इस महँगे या कठिनाई से प्राप्त बीज को खेत में बोने के पहले उसकी सुरक्षा की व्यवस्था करना भी फसल उत्पादन का एक महत्वपूर्ण कार्य है। खेतमें बोए जाने पर बीज को अंकुरित होने और उसके बाद पौधे की अवस्था में आ...

मिलेट:-स्वस्थ रहना है तो अपने खान-पान में शामिल करें मिलेट्स? पढ़े क्या होता है मिलेट्स और क्यों कहा जाता है इसे सुपर फूड्स?

मिलेट:-स्वस्थ रहना है तो अपने खान-पान में शामिल करें मिलेट पढ़े क्या होता है? मिलेट और क्यों कहा जाता है इसे सुपर फूड्स? मिलेट क्या है ? मिलेट एक प्रकार का अनाज है। जिसे लघु धान्य भी कहते है मिलेट में दो तरह के अनाज आते हैं। एक मोटा अनाज और दूसरा छोटे दाने वाले अनाज। दोनों poaceae फैमिली के अंतर्गत आते हैं। सामान्य तौर पर मिलेट से लोगों को बाजरा का ध्यान आता है। इसका कारण यह है कि बाजरा मिलेट में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। अनाज को तीन श्रेणी में रखा गया है। Normal Grains : कई लोगो का मत है कि इनका लगातार सेवन करते रहने से भविष्य में कई तरह की बीमारियों की सम्भावना रहती है।जैसे – गेहूं ,चावल। Neutral Grains : ये मोटा अनाज कहलाता है। इनके सेवन से शरीर में न कोई बीमारी होती है और न ही कोई बीमारी हो तो वह ठीक होती है। यह शरीर को स्वस्थ रखता है। ये अनाज ग्लूटेन मुक्त होते हैं। जैसे – बाजरा ,ज्वार ,रागी और प्रोसो। Positive Grains : पॉजिटिव ग्रेन्स के अंतर्गत छोटे अनाज आते हैं। इन्हें सिरिधान्य भी कहा जाता है। जैसे – कंगनी ,सामा ,सनवा ,कोदो -कुटकी,रागी छोटी कंगनी Neutral grains और positive grain...

चिया सीड की खेती से प्रति एकड़ होती है दो लाख की आमदनी !

चिया सीड की खेती से प्रति एकड़ होती है दो लाख की आमदनी ! #आवाज_एक_पहल ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■ मेक्सिको सुपर फूड चिया सीड आजकल भारतीय किसानों को अपनी और खूब आकर्षित कर रहा है।₹ साठ हजार प्रति क्विंटल बिकने वाले चिया सीड की खेती के प्रति हजारों किसान आकर्षित हुए हैं। हल्के उजले-काले और भूरे रंग के मिश्रण वाले चिया सीड काफी अधिक समय तक एनर्जी देने वाला सुपर फूड माना जाता है जिसके कारण आजकल लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। क्या है चिया बीज?            चिया  (साल्विया हिस्पनिका एल.) को मेक्सिकन चिया तथा सल्बा के नाम से भी जाना जाता है। चिया  लेमियेसी यानि पौदीना परिवार का  एक वर्षीय पौधा है। खाद्य के रूप में चिया का उपयोग 3500 बी.सी. में किया जाता था परन्तु मध्य मेक्सिको में  1500 बीसी और 900 बीसी के दरम्यान फसल के रूप में चिया को महत्व मिला है।  आजकल चिया फसल की खेती मेक्सिको, बोलविया, अर्जेंटीना, इकुआडोर और ग्वाटेमाला  में प्रचलित है।  भारत में कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश  और राजस्थान के कुछ  हिस्सों में भी चिया क...

बेकिंग सोडा किन फसलों के लिए अच्छा है ??

बेकिंग सोडा किन फसलों के लिए अच्छा है ?? खीरे जैसी सब्जियां एफिड्स और पाउडर फफूंदी के लिए पसंदीदा लक्ष्य हैं। सोडियम बाइकार्बोनेट घोल भी इस खाज के फल से छुटकारा पाने में मदद करता है। सोडा के 50 ग्राम, कपड़े धोने का साबुन के एक चौथाई और 10 लीटर पानी से तैयार तरल के साथ पौधों को निवारक उद्देश्यों के लिए छिड़का जाना चाहिए। सप्ताह में सिर्फ एक बार ऐसी प्रक्रियाओं को अंजाम देने से आप एक उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर सकते हैं: कवक गायब हो जाएगा, और खीरे के पत्ते और सतह खुद ही अपने पिछले स्वस्थ रूप में वापस आ जाएंगे। खीरे : रूट ड्रेसिंग समय से पहले पलकों को पीले होने से रोकेगा और फलने की अवधि को लम्बा खींच देगा। एक ककड़ी बिस्तर को निषेचित करने के लिए, आपको 1 टेस्पून का समाधान तैयार करने की आवश्यकता है। एल। सोडियम बाइकार्बोनेट और 5 लीटर पानी। फलों की पहली फसल के बाद झाड़ियों को इस रचना (प्रत्येक के लिए आधा लीटर) के साथ पानी पिलाया जाता है। अंकुरण को बढ़ाने और वायरस और बैक्टीरिया से भविष्य के विकास को बचाने के लिए बीज की तैयारी के चरण में सोडा का उपयोग उर्वरक के रूप में भी किया जाता है। इनोकुलम 1 ...

चिलबिल : एक ऐसा फल जिसके बारे में बेहद कम लोगों को जानकारी हैं।

 चिलबिल : एक ऐसा फल जिसके बारे में बेहद कम लोगों को जानकारी हैं। #आवाज_एक_पहल संभव है कि आपने इस फल का नाम पहले कभी नहीं सुना होगा। संभव है कि अगर कहीं आपको यह देखने को मिले तो आपको यकीन भी नहीं हो कि ऐसे भी होते हैं फल। फलों की जो कि जो हमारे मन में स्मृति बन गई है उससे बिल्कुल अलग है चिलबिल! अद्भुत, अजीब पर आकर्षक! अभी भी चिलबिल के हजारों पेड़ देखने को मिल जायेंगे,,पर दुर्भाग्य देखो की आज युवा पीढ़ी इसका सही नाम तक नही जानती....। चिरोल चिलबिल एक औषधीय वृक्ष है,इसे,चिरबिल्व,चिरोल,बन्दर की रोटी तो कुछ क्षेत्रों में इसे बंदर पापड़ी या बंदर बाटी का पेड़ भी कहा जाता है..... इस वृक्ष के फल भी पत्तियों के समान दिखाई पड़ते हैं,जो बंदरो को काफी प्रिय है.......यह फल ऐसा है लगता है कि दो पत्तियों के बीच एक बीज को फँसा दिया गया हो....। चिरबिल्व को गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में इसे चरेल ,चिरोल कहा जाता है..... इस के अलावा इसे कान्जो, वाओला, कांजू, बन चिल्ला, चिलबिल, सिलबिल, चिरबिल्व (संस्कृत) आदि नामों से जाना जाता है...। इस में जनवरी फरवरी माह में पुष्प खिलते हैं।   यह बहुत से औषधीय गुणों से सं...

जनवरी:- जाने जनवरी माह का कृषि कैलेंडर से ,खेती किसानी के कार्य

जनवरी:-   जाने जनवरी माह  का कृषि कैलेंडर से , खेती किसानी के कार्य साल का सब से ठंडा महीना जनवरी का होता है. इस महीने लोहड़ी व मकर संक्रांति जैसे पारंपरिक तीजत्योहार भी होते हैं. जनवरी के महीने में तापमान बहुत ज्यादा गिर जाने की वजह से पाला पड़ने लगता है, जिस का असर फसलों पर भी पड़ता है. पाले के नुकसान से बचने के लिए शाम के समय खेतों के आसपास आग जला कर धुआं करें.  इस से तापमान बढ़ जाता है और पाले का असर कम पड़ता है. फसलोत्पादन – गेहूँ – गेहूँ में दूसरी सिंचाई बोआई के  40-45  दिन बाद कल्ले निकलते समय और तीसरी सिंचाई बोआई   के  60-65  दिन बाद गांठ बनने की अवस्था पर करें।  गेहूं इस मौसम की खास फसल है. उस का खास ध्यान रखना होता है. 25 से 30 दिन के अंतर पर गेहूं में सिंचाई करते रहें. इस समय सिंचाई अच्छी पैदावार के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इस माह गेहूं के पौधों में शिखर जडें़ और कल्ले फूटते हैं. जनवरी के आखिरी सप्ताह तक हलकी मिट्टी वाली जमीन में यूरिया भी दे सकते हैं. गेहूँ की फसल को चूहों से बचाने के लिए जिंक फास्फाइड से बने चारे अथवा   एल्यूमिनियम फास्फाइड की टिकिया का प्रयोग करें। दीमक...

बाजरा : एक बहुमूल्य अनाज जिसे भुल चुके हैं हम!

बाजरा : एक बहुमूल्य अनाज जिसे भुल चुके हैं हम! #आवाज_एक_पहल बाजारा ,सांवा,सामा,कोदो , रागी, जौ, कुटकी ,कांगनी! ये सब भारत में उत्पादित होने वाले मोटे अनाजों के नाम हैं।हममें से ज्यादातर लोगों ने इन अनाजों का नाम तक नहीं सुना होगा। आपको हैरान की होगी की ये बहुमूल्य अनाज पिछले 6500 सालों से हम भारतीयों का मुख्य आहार हुआ करता था। इससे बने चावल, खिचड़ी हलवा, लड्डू, सत्तू, भुंजा, चूड़ा इत्यादि व्यंजन हमारे पसंदीदा आहार हुआ करते थे। हरित क्रांति के बाद हमारी डाइट सिर्फ चावल और गेहूं तक सिमट के रह गई और हम सबने इन बहुमूल्य अनाजों का दरकिनार कर दिया हैं। आज जब हमारी आबादी का ज्यादातर हिस्सा मधुमेह, मोटापे और हृदय रोगों से पीड़ित हैं। विशेषज्ञ अब इन मोटे अनाजों के सेवन करने की सलाह दे रहे हैं। ये अनाज धीरे-धीरे फैशन में आ रहा है।  #बाजरा भारत में सर्दी के मौसम में खाया जाने वाला अनाज है "बाजरा"पर इसकी उपयोगिता हम भूल चुके है,यदि आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ ले तो निश्चित ही 10 किलो बाजरा पीसवा ही लेंगे ......सर्दी की मौसम में इसकी रोटी सुबह व शाम को या खिचड़ी जरुर खानी चाहिये बाजरा गर्मी के...