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जैविक खेती -मात्र 100/-की बोतल पर किसान के बड़े काम की चीज है "पूसा सम्पूर्ण"

 जैविक खेती - मात्र 100/-की बोतल पर किसान के बड़े काम की चीज है "पूसा सम्पूर्ण" आज हम जानेंगे पूसा के एक महत्वपूर्ण कृषि उपयोगी उत्पाद पूसा संपूर्ण(Pusa Sampoorn) बायो फर्टिलाइजर के बारे में यह उत्पाद तीन बैक्ट्रिया का संतुलित मिश्रण है जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश के बैक्टीरिया होते हैं। यह तीनों बैक्ट्रिया फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश उपलब्ध कराती है। यह जो तीनों बैक्ट्रिया हैं यह किस तरीके से काम करते हैं फसल में इनके बारे में आज विस्तृत से जानेंगे साथ ही साथ यह उत्पाद का किस तरीके से प्रयोग करें और इस से हमें क्या क्या फायदा हो सकता है तथा क्या सावधानी रखें इसके बारे में विस्तार से जानेंगे। पूसा संपूर्ण एक तरल बायोफर्टिलाइजर है जिसमें नाइट्रोजन,फास्फोरस तथा पोटाश के बैक्टीरिया को कंसोटिया के फॉर्म में रखा गया है। यह उत्पाद जैविक खेती करने वाले किसान के लिए कोई वरदान से कम नहीं है क्योंकि इसमें न्यूट्रिशन के मुख्य तत्व NPK तीनों चीज उपलब्ध हो जाते हैं। इस तरीके से काम करता है पूसा संपूर्ण पूसा संपूर्णा के तीन बैक्ट्रिया जिसमें से नाइट्रोजन के लिए है एजोटोबेक...

छत्तीसगढ़ – मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों की 28वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया उद्घाटन

छत्तीसगढ़ – मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों की 28वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया उद्घाटन नए कृषि सुधार कानून जैसे ठोस कदम खेती को समृद्धता देने वाले हैं -श्री तोमर 26 जुलाई 2021, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की 28वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का उद्घाटन सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में भारत सरकार गांव-गरीब-किसान-किसानी की प्रगति के लिए प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। इस दिशा में कई योजनाएं प्रारंभ की गई है। देशभर में गांव-गांव अधोसंरचना विकसित करने के लिए एक लाख करोड़ रूपए के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड सहित आत्मनिर्भर भारत अभियान में कुल डेढ़ लाख करोड़ रूपए से अधिक के पैकेज शुरू किए गए हैं। हर सप्ताह मंत्रालय में इसकी प्रगति के लिए बैठकें होती है। इसी तरह, 6,850 करोड़ रू. के खर्च से 10 हजार नए एफपीओ के गठन की स्कीम तथा किसानों के सशक्तिकरण के लिए नए कृषि सुधार कानून जैसे ठोस कदम खेती को समृद्धता देने वाल...

बैंगन में फल छेदक इल्ली का नियंत्रण ❗

🍆 बैंगन में फल छेदक इल्ली का नियंत्रण ❗ 👨‍🌾 किसान भाइयों एवं बहनों, यह बैंगन की फसल का मुख्य और बहुत ही खतरनाक कीट है। शुरूआत में इसकी छोटी गुलाबी सुंडियां पौधे की शीर्ष में छेद करके अंदर से गूदा खाती हैं और बाद पौधों में जब फल लगता है तो ये फल कुट (कैलिक्स) के उपर सुराख़ बनाकर फल के अंदर जाकर गूदा खाती है और सुराख़ को अपने मल से बन्द कर देते है। 🍆 प्रभावित फलों के ऊपर बड़े छेद नज़र आते हैं और खाने योग्य नहीं होते हैं। प्रभावित टहनियां मुरझाकर लटक जाती हैं। इसके द्वारा 50-93 प्रतिशत से ज्यादा क्षति हो जाती है। 🔴 नियंत्रण के उपाय 🔹 प्रभावित पत्तियां, टहनियां या फलों को तोड़कर खेत से कुछ दूर नष्ट कर देना चाहिए। 🔹 ज़मीन पर से गिरे हुए फल, पत्तियां और टहनियां हटा दें। 🔹 गंभीर प्रकोप होने पर पूरे पौधे को उखाड़ कर नष्ट कर दें। 🔹 पतंगों को आकर्षित करने और बड़ी संख्या में पकड़ने के लिए फेरोमॉन जाल का इस्तेमाल करें। 🔹 नीम तेल 10000 पीपीएम @ 600 मिली को 200 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। 🔹 रासायनिक नियंत्रण के लिए क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल १८.५% एस सी @ 80 ग्राम 200 लीटर पानी या क्लोर...

🌱 अरहर में उकठा रोग का नियंत्रण हुआ आसान

🌱 अरहर में उकठा रोग का नियंत्रण हुआ आसान❗ दलहनी  फसलों  में  अरहर  का विशेष स्थान है।  अरहर  की दाल में लगभग 20-21 प्रतिशत तक प्रोटीन पाई जाती है, साथ ही इस प्रोटीन का पाच्यमूल्य भी अन्य प्रोटीन से अच्छा होता है।  अरहर  की दीर्घकालीन प्रजातियॉं मृदा में 200 कि0ग्रा0 तक वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थरीकरण कर मृदा उर्वरकता एवं उत्पादकता में वृद्धि करती है। 👨‍🌾 आज हम अरहर की फसल में लगने वाला एक गंम्भीर उकठा रोग के बारे में बात करेंगे। यह रोग फ्यूजेरियम नामक कवक से फैलता है। अरहर की फसल को रोगों से बहुत हानि होती है। कभी कभी इनके प्रकोप से उत्पादन मे 50-60 प्रतिशत तक की कमी हो जाती है। ☘️उकठा रोग  का मुख्य कारण है बारिश के कारण अधिक पानी और बाद में अचानक सूखी हुई जमीन। साथ ही भाद्रपद महीने में गरमी बढ़ने के कारण  अरहर  के पौधे सूखने की समस्या होती है। सामान्य तौर पर निचले पत्ते पीले पड़ना, बाद में धीरे-धीरे पूरा पौधा सूख जाना या अचानक सभी पत्ते हरे पर सूखे हुए दिखाई देना, जैसे लक्षण मालुम पड़ते हैं। ☘️ अतः इनकी पहचान और रोकथाम करके अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। रोग के लक्षण साध...

ऐसे करें डायमंड बैक मोथ की पहचान एवं प्रबंधन

    ऐसे करें डायमंड बैक मोथ की पहचान एवं प्रबंधन 🌱 हीरक पृष्ठ पतंगे को आम तौर पर मामूली कीट समझा जाता है। हालांकि अधिक आबादी होने पर ये गोभी वर्गीय फ़सलों के लिए समस्या बन सकते हैं। क्षति का कारण पत्तियों में सुरंगें बनाने या पत्ती की निचली सतह खुरचने वाले लार्वा हैं। 🔰 कभी-कभी ऊपरी अधिचर्म अनछुई रहने पर भी टेढ़े-मेढ़े धब्बे दिखते हैं जिससे खिड़कियां सी बन जाती हैं। बड़े लार्वा बहुत पेटू होते हैं और गंभीर प्रकोप होने पर पूरी पत्ती चट कर सकते हैं जिससे केवल पत्ती का ढांचा ही बचता है। फूलों पर लार्वा की मौजूदगी से ब्रोकली या फूल गोभी में विकास में रुकावट आ सकती है। 🔰 वयस्कों को पकड़ने के लिए फेरोमॉन ट्रैप का इस्तेमाल करें और आबादी का अनुमान लगाएं। ⭕ पौध रोपाई से पहले सुनिश्चित करें कि पौध कीट मुक्त है। 🔰 न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस या बैसिलस थुरिंजिनिसिस पाउडर का कर इसकी छिड़काव संख्या को कम कर सकते हैं। ⭕ नीम तेल 1500 पीपीएम@ 1 लीटर 200 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। 🔰 क्लोरोट्रानिलिप्रोले 18.5% SC @ 20 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी के साथ प्रति ए...

वायरस जनित रोग हेतु करे इन कीटनाशकों का प्रयोग

वायरस जनित रोग हेतु करे इनमें से किसी एक कीटनाशकों का प्रयोग इसके लिए आप कोई एक 1:-स्पिरोटेट्रामेट 11.01% + इमिडाक्लो प्रिड 11.01% SC 100 मि ली प्रति एकड़ । 2:-फेन पायरोक्सीमेट 5 % EC 120 से 240 मि ली प्रति एकड़। 3:-डाइफेंनथ्यूरान 50 % WP 240 ग्राम प्रति एकड़। 👉कीटनाशकों उपयोग बदल-बदल कर करना चाहिये 👉कीटनाशकों की क्षमता को बढ़ाने के लिए दवा के साथ 2 ml /लीटर पानी SIL G सील जी का उपयोग करना चाहिये।

मूंग -उड़द में पाउडरी मिल्ड्यू का रोकथाम

* चूर्णिल आसिता रोग से परेशान है❓ * 👨‍🌾 किसान भाइयों एवं बहनों, मूंग एवं उड़द की फसल का यह एक फफूंदी जनित प्रमुख रोग है। 👉 इस रोग के प्रभाव से लगभग 21 प्रतिशत तक हानि होती है। ⭕ रोग का संक्रमण सर्वप्रथम निचली पत्तियों पर कुछ गहरे (बदरंगी) धब्बों के रुप में दिखाई देता है। 🔰 धब्बों पर छोटे-छोटे सफेद बिन्दु पड़ जाते हैं जो बाद में बढ़कर एक बड़ा सफेद धब्बा बनाते हैं। ⭕ जैसे-जैसे रोग की उग्रता बढ़ती है यह सफेद धब्बे न केवल आकार में बढ़ते हैं। परन्तु ऊपर की नई पत्तियों पर भी विकसित हो जाते हैैं। अन्ततः ऐसे सफेद धब्बे पत्तियों की दोनों सतह पर, तना, शाखाओं एवं फली पर फैल जाते हैं। 🔰 इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया न के बराबर हो जाती है और अन्त में संक्रमित भाग झुलस/सूख जाते हैं 🛑 रोग का प्रबंधन ⭕ रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन कर बुवाई करें। 🔰 फसल में घुलनशील सल्फर 0.2 प्रतिशत घोल का छिडकाव करें। ⭕ कार्बेन्डाजिम 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या केराथेन का 1 मिली प्रति लीटर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।