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लौकी में लगने वाले फल मक्खी का प्रबंधन कैसे करे।

  लौकी में लगने वाले  फल मक्खी का प्रबंधन कैसे करे? लौकी की खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी बुआई गर्मी एवं वर्षा के समय में की जाती है। यह पाले को सहन करने में बिलकुल असमर्थ होती है। इसकी खेती विभिन्न प्रकार की भुमि में की जा सकती हैं ।किन्तु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवांश्म युक्त हल्की दोमट भुमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गयी हैं। लौकी की जूस की मांग पिछले कुछ सालों से काफी बढ़ी हुई है। आयुर्वेद में भी लौकी के जूस का काफी महत्त्व बताया गया है।जिसके कारण लौकी की खेती करने वाले किसानों की संख्या में काफी बढोत्तरी आई है। आज की कड़ी में हम एक ऐसे कीट के बारे में बात करेंगे जो लौकी के प्रमुख कीटो में से एक है। जिसे किसान भाई फल मख्खी के नाम से जानते है। लौकी की फल मख्खी फल मक्खी अपने अंडे देने वाले भाग से फलों में छेंद करके अपने अंडे छोटे फलों में दे देती हैं जिससे निकला लार्वा फल को अंदर ही अंदर खाता हैं परिपक्व लार्वा फल छेद करके बाहर निकल जाता है इनसे ग्रसित फल खराब होकर गिर जाते हैंं। प्रबंधन के उपाय ■गर्मी के दिनों में गहरी जुताई करके ...

उद्यानिकी:-भिंडी की फसल में अधिक फल फूल के लिए क्या करे?

  उद्यानिकी:-भिंडी की फसल में अधिक फल फूल के लिए क्या करे? भिंडी की फसल की अगेती किस्मों की बुवाई फरवरी मार्च में की जा सकती है, और भिंडी मैलवैसीआई प्रजाति से संबंधित है। इसका मूल स्थान इथीओपिया है। यह विशेष तौर पर उष्ण और उपउष्ण क्षेत्रों में उगाई जाती है। भारत में भिंडी उगाने वाले मुख्य प्रांत उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल और उड़ीसा हैं। भिंडी की खेती विशेष तौर पर इसे लगने वाले हरे फल के कारण की जाती है। इसके सूखे फल और छिल्के को कागज़ उदयोग में और रेशा (फाइबर) निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है। भिंडी विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य खनिजों का मुख्य स्त्रोत है। पुष्पन अवस्था भिन्डी की बहुत ही महत्वपूर्ण अवस्था बुवाई के 36 -45 दिनों बाद भिन्डी की फसल में फूल वाली अवस्था प्रारम्भ होती हैं| भिन्डी की फसल में फूलों की संख्या को बढ़ाने के लिए :-  ■ 5-10 % फूल दिखाए देने पर होमोब्रासिनोलॉइड 0.04% डब्लू/डब्लू 100-120 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिला करे स्प्रे करें| ■ समुद्री शैवाल का सत् 200 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिला करे स्प्रे करें| ■ सूक्ष्म पोषक तत्व 200...

राजिम माघी पुन्नी मेला:- किसानों को लुभा रही है कृषि विभाग की प्रदर्शनी का (आई.एफ.एस मॉडल)

  राजिम माघी पुन्नी मेला:- किसानों को लुभा रही है कृषि विभाग की प्रदर्शनी का (आई.एफ.एस मॉडल) श्री नीलेश कुमार क्षीरसागर कलेक्टर गरियाबंद ,श्री चंद्रकांत वर्मा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गरियाबंद, श्री सुखनंदन राठौर ए. एस. पी. गरियाबंद एवं श्री जे. आर. चौरासिया ए. डी. एम. गरियाबंद ने किया कृषि विभाग की प्रदर्शनी का निरीक्षण। श्री एफ.आर.कश्यप उप संचालक कृषि जिला गरियाबंद ने बताया कि क्या है ? एकीकृत कृषि प्रणाली (I.F.S मॉडल) भारत में जनसँख्या वृद्धि एक  विकट समस्या हैं जहाँ एक और किसान के पास सीमित कृषक भूमि है वहीँ दूसरी और सीमित संसाधनों के रहते किसान को आवश्यक है की कृषि से अधिक से अधिक उपज प्राप्त हो सके इसलिए रसायनो का उपयोग कृषि में बढ़ता जा रहा है जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। कृषि में फसलोत्पादन अधिकतर मौसम आधारित होने के कारण विपरीत मौसम परिस्थितियों में आशान्वित उपज प्राप्त नहीं हो पाती। इससे कृषक आय पर प्रभाव पड़ता है जो की आर्थिक व् सामाजिक दृष्टिकोण से भी कृषक को प्रभावित करता है। इस हेतु यह आवश्यक हो गया है की कृषि में फसल के साथ साथ अन्य  घटको को भी समेकित किय...

सूत्रकृमि:- लाखो टन फसल को चौपट कर जाती है सूत्रकृमि

  सूत्रकृमि:- लाखो टन फसल को चौपट कर जाती है " सूत्रकृमि" डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर भारत में निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण बढ़ती हुई मांग के अनुरूप पूर्ति ना कर पाना भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए चिंता का विषय है। हल्दी की फसल के उत्पादन में गिरावट के प्रमुख कारणों में से एक कारण यह भी है कि कृषकों को हानी पहुँचाने वाले सूत्रकृमी की समस्याओं का उचित समाधान करने की जानकारी नहीं है। अत: प्रस्तुत लेख में धान और गेहूं के उत्पादन में बाधा पहुँचाने वाले जड़ – गांठ रोग के कारक, मेलेड़ोगाइन ग्रेमिनिकोला एवं उनका प्रबंधन हेतु उचित नियंत्रण विधियों का उल्लेख किया गया है। धान और गेहूं में जड़ – गांठ सूत्रकृमी, मेलेड़ोगाइन ग्रेमिनिकोला की व्यापक समस्या है। यह समस्या, पूर्व, उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार कुछ हिस्सों में इतनी गंभीर है जिससे फसल की पैदावार पर असर पड़ता है। यह सूत्रकृमी गतिहीन अंत: परजीवी है। विश्व में इस सूत्रकृमी की 90 से अधिक प्रजातियाँ ही भारत में प्रचलित हैं। मेलेड़ोगा...

सावधान:-गेहूं की फसल में लगा फफूंद जनक रोग

सावधान:-गेहूं की फसल में लगा फफूंद जनक रोग गेहूं की बालियां ऊपर से नीचे सूखने लगे तो समझो फफूंद रोग डॉ गजेंद्र चंद्राकर गेहूं की फसल में फफूंद जनक रोग के लक्षण पाए गए हैं। पौधों पर फफूंद के कारण गेहूं की बालियां सूखने का खतरा पैदा हाे गया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर बलौदाबाजार जिले में कृषि वैज्ञानिकों ने इस रोग के लक्षण में देखे हैं। वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल पर फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट नामक फफूंद जनक रोग के होने की पुष्टि कर दी है। किसानों ने कई गॉवो में पहली बार रोग के लक्षण देखने की बात कही है। इसकी वजह खेतों में ज्यादा नमी हो सकती है। गेहूं की फसल में पहली वार लगा फफूंद रोग। विशेषज्ञ ने कहा-सूखने लगती है गेहूं की फसल कृषिविशेषज्ञ ने गेहूं की फसल में फ्यूजेरियम हेड ब्लाइट फफूंद जनक रोग के लक्षण देखे। इसमें फंगस तो स्पष्ट नहीं दिखती पर रोग के कारण गेहूं फसल की बालियां उपर से नीचे की ओर सूखने लगती हैं। इस वजह से दानों की ग्रोथ नहीं हो पाती और उत्पादन गिर जाता है। खेतों में लंबे समय तक नमी रहने से लगी फंगस इसरोग का प्रकोप मौसम के प्रतिकूल होने के कारण हुआ। वर्षा के साथ कोहरा छाने एवं बादल...

जैविक खेती :-जैविक खाद बनाने का सस्ता विकल्प है ‘प्रोम’ (PROM)

  जैविक खेती :- जैविक खाद बनाने का  सस्ता विकल्प है ‘प्रोम’ (PROM)  फसल के उत्पादन में फॉस्फेट तत्व का प्रमुख योगदान होता है! रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग करने से खेती की लागत भी बढ़ती जा रही है, जमीन सख्त हो रही है, भूमि में पानी सोखने की क्षमता घटती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ भूमि तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ पर प्रतिकूल असर भी पड़ रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए नया उत्पाद विकसित किया गया है, जिसमें कार्बनिक खाद के साथ-साथ रॉक फॉस्फेट की मौजूदगी भी होती है। जिसे हम प्रोम के नाम से जानते हैं। ‘ प्रोम’ को विस्तार पूर्वक समझिये। प्रोम (फॉस्फोरस रिच आर्गेनिक मैन्योर) तकनीक से जैविक खाद घर पर भी तैयार की जा सकती है।  प्रोम, जैविक खाद बनाने की एक नई तकनीक है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। रॉक फॉस्फेट की मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (DAP) रासायनिक उर्वरक तैयार किए जाते हैं। प्रोम में विभिन्न फॉस्फोरस युक्त कार्बनिक पदार्थों जैसे- गोबर खाद, फसल अपशिष्ट, चीनी मिल का प्रेस मड, ज...

लौकी के फल में दाग कैसे दूर करे।

Dr.Gajendr Chandrakar Sr: ■Metiram 55%+ pyraclostrobin5%WG 6 ग्राम + 2 मिली SIL G सील जी प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें । ■Dimethomorph 12+Pyraclostrobin 6.7% WG -1.5 - 2 gm/ Lit.