Skip to main content

Posts

गुंडरदेही के किसानों ने सीखा घर पर ही जैविक कीटनाशक बनाना।

    गुंडरदेही के किसानों ने सीखा घर पर ही जैविक कीटनाशक बनाना। ग्राम गुंडरदेही विकासखण्ड-फिंगेश्वर में केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र, रायपुर द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम  आयोजित किया गया।  इस अवसर पर सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. चव्हाण विकास तुकाराम ने वर्तमान कोरोना महामारी की विषम परिस्थिति में सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण और सवर्धन पर ध्यान देने और वृक्ष लगाने का आव्हान किया।  साथ ही साथ नीम पेड़ का महत्व बताया। किस प्रकार हम अपने खेत में नीम पेड़ लगाकर नीम का जैवीक कीटनाशक कैसे बनायें और इसका उपयोग खेत में कीट और फफूँद को कैसे नियंत्रित करे। इसके ऊपर बातचीत की। एवम जैविक कीटनाशक बनाने की निम्नांकित विधियो के बारे में बताया गया। 1. नीमास्त्र (रस चूसने वाले कीट एवं छोटी सुंडी इल्लियां के नियंत्रण हेतु) सामग्री :- 1. 5 किलोग्राम नीम या टहनियां 2. 5 किलोग्राम नीम फल/नीम खरी 3. 5 लीटर गोमूत्र 4. 1 किलोग्राम गाय का गोबर बनाने की विधि सर्वप्रथम प्लास्टिक के बर्तन पर 5 किलोग्राम नीम की पत्तियों की चटनी, और 5 किलोग्राम नीम के फल पीस व कूट कर डाले...

बैंगन में फल छेदक कीट का नियंत्रण ❗

  🍆 बैंगन में फल छेदक कीट का नियंत्रण ❗ बैंगन के पौधों में कई तरह के कीटों के प्रकोप का खतरा बना रहता है। इनमें से एक है तना छेदक कीट। इस कीट से बैंगन की फसल को बहुत हानि पहुंचती है।  👨‍🌾 किसान भाइयों बैंगन की फसल में शीर्ष एवं फल छेदक कीट की सूण्डियां गुलाबी रंग की होती हैं जो लगभग बालरहित होती हैं। नवजात सूण्डियां नई शाखाओं में छिद्र करके प्रवेश कर जाती हैं जिसके कारण शाखाएं मुरझा जाती हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है। 🍆 जब फल लगते हैं तो सूण्डियां फलों में घुसकर उन्हें हानि पहुंचाती हैं। फलों में छेद सूण्डियों के बारह आने के बाद ही दिखाई पड़ते हैं। इस कीट द्वारा 20-25 प्रतिशत तक नुकसान होता है।😱 अगर आप भी हैं परेशान इन कीटों से तो इस पोस्ट में दिए गए उपायों को अपना कर आप इससे आसानी से निजात पा सकते हैं। 🛡️ नियंत्रण   👉 खेत को साफ सुथरा रखें।  🌱 जिस खेत में बैंगन की फसल पिछले वर्ष ली हो उसमें बैंगन कदापि न लगाएं।  🍆 बैंगन की दो कतारों के बाद एक कतार धनिया या सौंफ की लगाएं।  ⭕ अगर आपके क्षेत्र में उपलब्ध हों तो प्रतिरोधी या सहनशील किस्में ...

35-40 दिन के धान में अधिक कंसे के लिए क्या करे किसान

🌾 ऐसे पाएं धान में अधिक पैदावार ❗ 👨‍🌾 किसान भाइयों धान की रोपाई के बाद पौधों में अधिक फुटाव एवं उचित वृद्धि विकास होना बहुत ही आवश्यक है। 🌾 क्योंकि पौधों का विकास ही यह सुनिश्चित करता है की हम कितना उत्पादन ले सकते हैं। इसके लिए निम्न उपाय अपनाएं- 🌾 सर्वप्रथम किसान भाइयों मृदा परिक्षण के अनुसार उचित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रबंधन करना चाहिए। 🔰 समय समय पर रोग एवं कीटों की निगरानी कर इनका नियंत्रण करना चाहिए। ⭕ पौध रोपाई के 20 - 25 दिनों पर खरपतवार निराई गुड़ाई कर निकल देना चाहिए। 🛡️ जियोलाइफ बैलेंस न्यूट्री मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट - 250 ग्राम एवं जियोलाइफ नैनो एनपीके 19-19-19 पानी में घुलनशील उर्वरक 200 ग्राम 200 लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। 👉 PI का बायोविटा दानेदार 4 किलोग्राम प्रति एकड़ जमीन के माध्यम से या बायोविटा तरल 25 मिली प्रति 15 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। 🌱 धानुका का धनज़ाइम गोल्ड तरल को 200 मिली 200 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ छिड़काव करें। या धनज़ाइम गोल्ड दानेदार 5 किलोग्राम प्रति एकड़ जमीन के माध्यम से दें। ✅ यूरिया 25 किलोग्राम, जिं...

पाउडरी मिल्ड्यू:-ऐसे पाएं मिर्च की स्वस्थ फसल ❗

🌶️ ऐसे पाएं मिर्च की स्वस्थ फसल ❗ 👨‍🌾 किसान भाइयों इस समय मिर्च की फसल वृद्धि विकास की अवस्था पर है। साथ ही कुछ स्थानों पर फूल एवं फलों की अवस्था पर है। 🌶️ इस समय मिर्च की फसल में पाउडरी मिल्ड्यू रोग का संक्रमण देखा जा रहा है। यह मिर्च की फसल का प्रमुख रोग है जो पौधों की पत्तियों, तना और फलों को प्रभावित करता हैं। 😱 👉 इस रोग में पौधों पर सफेद पाउडर के समान चिन्ह बन जाते हैं। अधिक प्रकोप पर पूरे पौधे पर भूरे सफेद मटमैले धब्बे फैलने से पौधा बौना रह जाता है और पत्तियाँ व फूल झड़ जाते हैं तथा फल बहुत कम छोटे आकार के बनते हैं।🛡️ 🔰 नियंत्रण के उपाय 🔹 ग्रीष्मकालीन खेत की गहरी जुताई करें, ताकि ज़मीन में दबे कीट व फंफूद तेज गर्मी से नष्ट हो जाएं। 🔸 खेत में पड़े अवशेष, खरपतवार व अन्य वैकल्पिक पौधों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। 🔹 पौधों के बीच उचित पौध अंतराल रखें। 🔸 रोग मुक्त फसल हेतु स्वस्थ बीज व पौध लगायें। 🔹 आवश्यकतानुसार ही सिंचाई करें। 🔸 रोग व कीट से ग्रसित पत्तियों व फलों को तोड़कर नष्ट कर दें। 🔹 रासायनिक नियंत्रण के लिए एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 23% एससी @ 200 मिली या फ्लूसि...

कृषि विभाग:-50% अनुदान पर 80 कृषकों को किया गया नैपसैक स्प्रेयर का वितरण

  कृषि विभाग -  50% अनुदान पर 80 कृषकों को किया गया नैपसैक स्प्रेयर का वितरण उप संचालक कृषि जिला गरियाबंद श्री एफ. आर. कश्यप के निर्देशानुसार आज दिनांक  13/8/ 2021 को कृषि विभाग फिंगेश्वर द्वारा केंद्र राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (ऑइल सीड) योजना अंतर्गत पौध संरक्षण यंत्र नेपसेक स्पेयर का अंचल के 80 कृषकों को वितरण किया गया। कृषि विकास अधिकरी श्री के.के.साहू ने दी सलाह की किस प्रकार किस नोजल का प्रयोग कर रसायनिक दवा का छिड़काव कर किसान भाई रसायनिक दवा का उचित ढंग से कर सकते है प्रयोग। रसायनिक दवाओं के छिड़काव में नोजल एक अहम भूमिका निभाता है। कई किसान भाइयों को पता नही होता कि किस रसायनिक दवा के छिड़काव हेतु किस प्रकार के नोजल का उपयोग करना है रासायनिक दवा छिड़कवा के समय नोजल का उचित चयन दवा छिड़कांव का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। नोज़ल एक निर्धारित क्षेत्र पर होने वाले छिड़काव की मात्रा, छिड़काव की समानता, दवा की मात्रा को निर्धारित करता है। होलो कोन नोज़ल (Hollow cone nozzles): - आमतौर पर इस प्रकार के नोज़ल का उपयोग मुख्य रूप से कीटनाशक और फफूंदीनाशक दवाइयों छिड़काव के लिए किय...

बैंगन में फूल झड़ने से रोकने के उपाय❗

🍆 बैंगन में फूल झड़ने से रोकने के उपाय❗ 👨‍🌾 किसान भाइयों, बैंगन की खेती भारत में सभी प्रदेशों में की जाती है। यह भारत की प्रमुख सब्जी वाली फसल है। यदि इसकी समय रहते देखरेख न की जाए तो इसमें भारी नुकसान होता है। इसमें फूल गिरने की समस्या प्रमुख है। 🍆 बैंगन में फूल झड़ने के प्रमुख कारण: 👉 आर्द्रता:- यदि आर्द्रता 60% से नीच या फिर 85 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाए, तो बैंगन में अक्सर फूल झड़ने लगते हैं। 🌧️ मौसम:- अगर तापमान 10 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे आ जाए या फिर 35 डिग्री सेंटीग्रेड के ऊपर चला जाए, तो बैंगन में अक्सर फूल झड़ने लगते हैं। 👉 नमी:- भूमि में ज्यादा और बहुत कम नमी के कारण भी फूल झड़ने लगते हैं। ♻️ खाद व उर्वरक:- अगर असंतुलित मात्रा में खाद व उर्वरक का इस्तेमाल किया जाए, तो भी बैंगन में फूल झड़ने की समस्या हो सकता है। 🐛 कीट व रोगों का प्रकोप:- अगर बैंगन की फसल में कीट व रोगों का प्रकोप हो जाए, तो भी फूल झड़ने लगते हैं। बैंगन में ज्यादातर रस चूसने वाले कीट जैसे, मकड़ी और सफेद मक्खी लगने से फूल झड़ने लगते हैं। इसके अलावा पौधों में हार्मोन का असंतुलन भी फूल झड़ने का कारण...

सजीव रसायन जल:-यह फसलों को कीट व इल्लियों को बचाता है।

सजीव रसायन जल:-यह फसलों को कीट व इल्लियों को बचाता है। एक मिट्टी के मटके में 🌿आधा किलो देशी गाय का ताजा गोबर, 🌿50 ग्राम पुराना काला गुड़ , 🌿500 ग्राम नीम के पत्ते, 🌿500 ग्राम करंज के पत्ते, 🌿500 ग्राम कनेर के पत्ते , 🌿500 ग्राम मदार के पत्ते , ⭕इन सभी पत्तो को पत्थर पर लुगदी बनाकर मटके में डालकर मटके के मुँह को कपड़े से बांधकर किसी छायादार पेड़ की छांव में रख लेवें। ⭕7 दिनों बाद इस घोल को महीन कपड़े से छानकर निकाल लेवें ।शेष बचे पदार्थ को वापस मटके में डालकर उसमे गोमूत्र डाल देवे । ⭕7 दिनों बाद फिर से निकाल सकते है । इस घोल को छानकर किसी प्लास्टिक के पात्र में भरकर धूप में रख लेवें। ⭕2 प्रतिशत की मात्रा से 100 लीटर पानी मे 1लीटर सजीव रसायन जल खेत की फसलों पर स्प्रे करें। ⭕इस सजीव जैविक रसायन को बनने के बाद 3 साल तक उपयोग किया जा सकता है। ⭕यह फसलों को कीट व इल्लियों को बचाता है। ⭕यह फसलो में सूक्ष्म पोषक तत्वों की आंशिक पूर्ति करता है।।।