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जैविक खेती:- जाने क्या है? गोधन सुपर कंपोस्ट खाद

गोधन सुपर कंपोस्ट खाद गौठान में वर्मी कंपोस्ट के साथ-साथ अब  गोधन सुपर कंपोस्ट खाद का भी उत्पादन शुरू कर दिया गया है, ताकि किसान भाइयों को अत्यंत अल्प कीमत में उच्च जैविक विशेषताओं वाली खाद गोधन सुपर कंपोस्ट उपलब्ध हो सके। सुपर कंपोस्ट खाद का न्यूनतम मूल्य रू. 6 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। यह 2 किलो, 5 किलो और 30 किलो के पैकेट में विक्रय हेतु  सहकारी सोसाइटी में उपलब्ध है। गोधन सुपर कंपोस्ट उत्पादन तकनीक गोठनों में गोबर से कम लागत उत्पादन तकनीक वेस्ट डीकंपोजर का उपयोग कर 40 से 45 दिनों में गोधन सुपर कंपोस्ट खाद तैयार की जा रही है। गोबर को शीघ्र डीकंपोज करने के लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ एवं 1 शीशी वेस्ट डीकंपोजर (20 ग्राम) मिलाकर घोल तैयार किया  जाता है। इस घोल को 3 से 7 दिन तक प्रतिदिन 2  बार लगभग 2 मिनट तक लकड़ी के डंडे से हिला  कर रखा जाता है। डीकंपोजर घोल का उपयोग डीकंपोजर घोल में 9 से 10 गुना पानी  मिलाकर 20 से 25 दिन पुराने 1500 किलो गोबर  (एक ट्रैक्टर ट्राली) में लगभग 200 लीटर घोल को  छिड़ककर अच्छी तरह से मिला दिया जाता है...

वर्मी कम्पोस्ट:- धान की फसल के साथ- साथ और किन फसलों पर कितनी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करे।

  वर्मी कम्पोस्ट:- धान की फसल के साथ- साथ और किन फसलों पर कितनी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करे। केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है। यह केंचुआ आदि कीड़ों के द्वारा वनस्पतियों एवं भोजन के कचरे, गोबर आदि को विघटित करके बनाई जाती है। वर्मी कम्पोस्ट में बदबू नहीं होती है और मक्खी एवं मच्छर नहीं बढ़ते है तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता है। तापमान नियंत्रित रहने से जीवाणु क्रियाशील तथा सक्रिय रहते हैं।  वर्मी कम्पोस्ट डेढ़ से दो माह के अंदर तैयार हो जाता है। इसमें 2.5 से 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1.5 से 2 प्रतिशत सल्फर तथा 1.5 से 2 प्रतिशत पोटाश पाया जाता है। इस खाद को तैयार करने में प्रक्रिया स्थापित हो जाने के बाद एक से डेढ़ माह का समय लगता है। आइए आज की कड़ी में जानते है कि धान की फसल के साथ किन किन फसलों पर किस-किस समय वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग कर सकते है। संकलन कर्ता हरिशंकर सुमेर

बीजोपचार:-धान की फसल में टीके का काम करता है 17%नमक पानी का "बीजोपचार"

  बीजोपचार:-धान की फसल में टीके का काम करता है 17%नमक पानी का "बीजोपचार" बीज उपचार एक प्रक्रिया या विधि है, जिसमें पौधों को बीमारियों और कीटों से मुक्त रखने के लिए रसायन, जैव रसायन या ताप से उपचारित किया जाता हैं| पोषक तत्व स्थिरीकरण हेतु जीवाणु कलचर से भी बीज उपचार किया जाता है| धान के बीजो को बुवाई से पहले 17%नमक के घोल में उपचारित कर लेवे।धान की बीज उपचार हेतु नमक की 17% घोल से उपचार करे। बीज उपचार हेतु 17% नमक का घोल बनाने का तरीका ■किसी बडे बरतन पर पानी और आलू/अंडा डाल दे उसमें नमक डालते रहे। ■ जब आलू/अंडा तैरने लग जाए तो समझो घोल तैयार हो गया। ■उसमें धान के बीज डूबा दे। ■ बदरा उपर तैयार रहता है पुष्ट निचे बैठते जाता है ■बदरा को अलग कर बीज निकाल कर अच्छे से धुलाई कर छाया मे सूखा कर प्रयोग करे। ■ROOT RISE  5 ग्राम + Trichoderma 5ग्राम + Pseudomonas 5 ग्राम प्रति किलो बीज या ■ROOT RISE  5 ग्राम +2 ग्राम carbendazim प्रति किलो बीज  की दर से उपचार करे। 5 ml जीवाणु तरल ( consortia of  bacteria AGN ) से बीजोपचार ■17%नमक के घोल के उपयोग से स्वस्थ बीजो के चुनाव के...

गलती से यदि खरपतवार नाशी का छिड़काव हो जाये तब क्या करे।

* 🌱 खरपतवार वे अवांछित पौधे हैं जो किसी स्थान पर बिना बोए उगते हैं। जिसके कारण किसान को लाभ के बदले भारी नुकसान होता है। मूंग, उड़द, मक्का, गन्ना की फसल में आए खरपतवार को नष्ट करने के लिए खरपतवार नाशक का छिड़काव किया जाता है। 🙏 किसान दोस्तों, अगर आपने गलती से फसल पर खरपतवार नाशक का छिड़काव किया है, तो परेशान न हों। इसके लिए एकमात्र रामबाण उपाय है। एक 15 लीटर पंप के लिए 75 ग्राम जैविक गुड़ और 60 ग्राम डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) लेकर पौधा गीला होने तक छिड़काव किया जाए। 👉 टिप- डी ए पी 2 घंटे के लिए भिगो दें ✔ प्रभावित फसल पर गुड़ और डीएपी के घोल का 7/7 घंटे के अंतराल पर 4 बार छिड़काव करने से 90-95% जड़ी-बूटियों का प्रभाव कम हो जाता है।

सावधान:-खरीदने जा रहे है खेती-बाड़ी का सामान,तो इन बातों का रखे ध्यान।

  सावधान:- खरीदने जा रहे है खेती-बाड़ी का सामान,तो इन बातों का रखे ध्यान। जब भी कोई किसान भाई अपने खेत के लिए बीज, उर्वरक और कीटनाशकों को खरीदना चाहता है, तो निम्न बातो का जरूर ध्यान रखें क्योंकि गुणवत्ता युक्त कृषि आदान सामग्रियों के उपयोग से ही पैदावार अच्छी होगी। आज की कड़ी में डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर बताएंगे कि सहकारी समिति या निजी संस्था से आदान सामग्रियों को खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ⭕किसानों को लाइसेंस वाली दुकान से ही खाद, बीज और कीटनाशक खरीदना चाहिए। ⭕इस संबध में ब्लॉक में कृषि कार्यालय से भी जानकारी ले सकते हैं। ⭕जब भी इन तीनों चाजों को खरीदें, तो ध्यान दें कि ये सीलबंद हों, साथ ही अवधि समाप्त होने की तारीख भी देख लें। ⭕किसान भाई खरीद करने पर दुकानदार से पक्का बिल ज़रूर लें, उस बिल में लाइसेन्स नंबर, पूरा नाम, पता और हस्ताक्षर होना चाहिए. इसके बाद बिल में उत्पाद का नाम, लॉट नंबर, बेन्च नंबर, और तारीख़ भी देखें। ⭕ध्यान दें कि उर्वरक बैग पर फर्टिलाईज़र, बायोफर्टीलाईज़र, ऑर्गेनिक फर्टीलाईज़र या नॉन-एड...

जैविक खेती:- हरी खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत !!!

  जैविक खेती:- हरी खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत !!! हरी खाद को एक शुद्ध फसल के रूप में खेत की उपजाऊ शक्ति, भूमि के पोषक और जैविक पदार्थो की पूर्ति करने के उदेश्य से की जाती है| इस प्रकार की फसलों को हरियाली की ही अवस्था में हल या किसी अन्य यंत्र से उसी खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है| हरी खाद से भूमि का संरक्षण होता है और खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है| आज कल भूमि में लगातार फसल चक्र से उस खेत में उपस्थित फसल की पैदावार और बढवार के लिए आवश्यक तत्व नष्ट होते जाते है| इनकी आपूर्ति और पैदावार को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक अच्छा विकल्प हो सकता है| हरी खाद के लिए बनी किस्मे, दलहनी फसले या अन्य फसलों को हरी अवस्था में जब भूमि की नाइट्रोजन और जीवाणु की मात्रा को बढ़ाने के लिए खेत में ही दबा दिया जाता है तो इस प्रक्रिया को हरी खाद देना कहते है| हरी खाद वाली फसलें 🍀हरी खाद वाली खरीफ की फसलें लोबिया, मुंग, उड़द, ढेचा, सनई व गवार हरी खाद की फसल से अधिकतम कार्बनिक पदार्थ और नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए एक विशेष अवस्था में उसी खेत में दबा देना चाहिए| इन फसलों को 30 से 50 दिन की अवधि में ही पलट दे...

जैविक खेती:- हरी खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत !!!

  जैविक खेती:- हरी खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत !!! हरी खाद को एक शुद्ध फसल के रूप में खेत की उपजाऊ शक्ति, भूमि के पोषक और जैविक पदार्थो की पूर्ति करने के उदेश्य से की जाती है| इस प्रकार की फसलों को हरियाली की ही अवस्था में हल या किसी अन्य यंत्र से उसी खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है| हरी खाद से भूमि का संरक्षण होता है और खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है| आज कल भूमि में लगातार फसल चक्र से उस खेत में उपस्थित फसल की पैदावार और बढवार के लिए आवश्यक तत्व नष्ट होते जाते है| इनकी आपूर्ति और पैदावार को बनाए रखने के लिए हरी खाद एक अच्छा विकल्प हो सकता है| हरी खाद के लिए बनी किस्मे, दलहनी फसले या अन्य फसलों को हरी अवस्था में जब भूमि की नाइट्रोजन और जीवाणु की मात्रा को बढ़ाने के लिए खेत में ही दबा दिया जाता है तो इस प्रक्रिया को हरी खाद देना कहते है| हरी खाद वाली फसलें 🍀हरी खाद वाली खरीफ की फसलें लोबिया, मुंग, उड़द, ढेचा, सनई व गवार हरी खाद की फसल से अधिकतम कार्बनिक पदार्थ और नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए एक विशेष अवस्था में उसी खेत में दबा देना चाहिए| इन फसलों को 30 से 50 दिन की अवधि में ही पल...