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दानीकुंडी में ढेंकी चावल का स्वाद लिया मुख्यमंत्री ने : ढेंकी चावल बनाकर प्रतिदिन करीब 400 रूपये की आय हो रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को

  दानीकुंडी में ढेंकी चावल का स्वाद लिया मुख्यमंत्री ने : ढेंकी चावल बनाकर प्रतिदिन करीब 400 रूपये की आय हो रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दानीकुंडी की स्व-सहायता समूह की महिलाएं ढेंकी चावल कुटाई कर प्रतिदिन करीब 400 रूपये की आय प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने विगत दिनों जिले के भ्रमण के दौरान इड़हर की सब्जी के साथ ढेंकी चावल का स्वाद लिया। उन्हें यह भोजन बहुत भाया और मुख्यमंत्री ने इसकी तारीफ करते हुए ढेंकी चावल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये गांव के हर घर में इस परंपरागत पद्धति को अपनाने पर जोर दिया, जिससे घर बैठे रोजगार के साथ-साथ लोगों को पोषक तत्वों से परिपूर्ण विशुद्ध चावल भी मिलेगा।      मुख्यमंत्री ने ग्राम दानीकुंडी में विविध सुविधा सह मूल्य संवर्धन केन्द्र में संचालित केन्द्र में ढेंकी चावल प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर प्रसंस्करण कार्य में जुटी वनधन महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत भी की। महिलाओं ने उन्हें बताया कि वर्तमान में वे मोटे किस्म के चावल का ढेंकी से कुटाई कर रही है। वन विभाग द्...

समसामयिक सलाह:- गेहूं में जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें

  समसामयिक सलाह:- गेहूं में जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें। पिछले पोस्ट में आप ने चने की फसल पर इल्लियों के नियंत्रण के बारे में जाना था समसामयिक सलाह की इस कड़ी में हम आज गेंहूँ फसल पर अच्छे उत्पादन के लिए वैज्ञानिकों द्वारा दी गयी सलाह के बारे में जानेंगे जो कि निश्चित किसान भाइयों के लिए काफी उपयोगी होगी।   भा.कृ.अनु.परिषद,भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों को सिंचाई, खाद, खरपतवार नियंत्रण एवं कीट नियंत्रण के लिए उपयोगी सलाह दी गई है, जो निम्न है – उर्वरक प्रयोग ■गेहूं के लिए सामान्यतया नत्रजन, स्फुर और पोटाश 4:2:1 के अनुपात में देना चाहिए। ■असिंचित खेती में 40:20:10, सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20, सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम/ हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक देना चाहिए।   ■पूर्ण सिंचित खेती में नत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी में ओरना (3-4 इंच गहरा) चाहिए। ■ शेष नत्रजन पहली सिंचाई के साथ देना चाहिए। वर्षा आधारित या सीमित सिंचाई की खे...

मौसम अपडेट: कल से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भारत को करेगा प्रभावित, नए बरसाती दौर में उत्तर के सीमित भागो व मध्य भारत के कई इलाकों मे हल्की बारिश की संभावना:

  मौसम अपडेट: कल से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भारत को करेगा प्रभावित, नए बरसाती दौर में उत्तर के सीमित भागो व मध्य भारत के कई इलाकों मे हल्की बारिश की संभावना:  हाल ही में हुई बरसात के बाद एक नई मौसमी प्रणाली दोबारा उत्तर व मध्य भारत को प्रभावित करेगी। लेकिन उत्तर मैदानी इलाकों में इसका असर सीमित इलाको में ही होगा। वही दक्षिण में बारीश का प्रसार काफी फैला हुआ होगा।  मौसमी चक्र:  ● एक कमजोर WD उस समय उत्तरी पाकिस्तान व साथ लगते इलाको पर बना हुआ है। जिसकी हवाओँ से प्रेरित चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान पर बनना शुरू हो गया है। ● दक्षिण अरब सागर में एक सक्रिय चक्रवाती हवाओँ का क्षेत्र बना हुआ है। ● एक द्रोणिका उत्तर पाकिस्तान से पुर्वी गुजरात तक बनी हुई है। ● एक और सक्रिय द्रोणिका तटीय महाराष्ट्र से दक्षिण कर्नाटक तक बनी हुई है जो मध्य भारत मे बरसात बढ़ाने में सहायक होगी।  इन दोनों द्रोणिकाओ को निचले स्तर की पुर्वी हवाओँ बादल निर्माण में सहायता करेगी।  कल से अगले 2 दिन जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व लद्दाख में बिखरी हुई हल्की बारिश होगी। ऊंचे पहाड़ों पर...

राजिम भक्तिन माता जयंती के अवसर पर कृषि विभाग गरियाबंद द्वारा प्रदर्शनी लगाकर किसानों को दी विभागीय योजनाओं की जानकारी।

  राजिम भक्तिन माता जयंती के अवसर पर कृषि विभाग गरियाबंद द्वारा प्रदर्शनी लगाकर किसानों को दी विभागीय योजनाओं की जानकारी। राजिम भक्तिन माता जयंती दिनांक 7-01-2021 को राजिम में कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में  किसानों को विभाग द्वारा संचालित शाकम्भरी योजनान्तर्गत डीजल पम्प, विद्युत पम्प एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत नैपसेक स्प्रेयर , बैटरी स्प्रेयर एवं अन्य विभागीय योजनाओं की जानकारी कृषको को प्रदान की गई। उक्त कार्यक्रम में श्री एफ. आर कश्यप  उप संचालक कृषि जिला गरियाबन्द श्री बी आर साहू वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखण्ड फिंगेश्वर एवं समस्त कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित थे।

जैविक खेती-ये सूक्ष्म जीव बचाएंगे आपकी फसल को कीड़ो और बीमारियों से

  जैविक खेती- ये सूक्ष्म जीव बचाएंगे आपकी फसल को कीड़ो और बीमारियों से     रासायन का छिड़काव फसल में करने से होने वाले दुष्परिणाम से जमीन बंजर हो रही है और वातावरण भी प्रदूषित होता है। इसके साथ ही धीरे-धीरे इन रसायनों का असर भी कम होने लगा है क्योंकि ये कीट रसायनों के प्रति सहनशीलता विकसित कर देते हैं। जिसके कारण हमे इन रसायनों का अधिक मात्रा में भी प्रयोग करना पड़ता है जिससे किसान की लागत बढ़ने के साथ-साथ नुकसानदायक भी होता है। रसायनों के जैविक विकल्प में कई ऐसे सूक्ष्म जीव है जो ना कि कीट/रोगों से बचाते है अपितु पर्यावरण को नुकसान भी नही पहुंचाते। आज की कड़ी में हम ऐसे ही सूक्ष्म जीवों के बारे में जानेंगे। 1 Trichoderma  : -  एक कवक जो अन्य कवक खाता है।  उपयोग : - करपा, भूरी, डाउनी, मिट्टी के कवक के लिए सर्वश्रेष्ठ।  2  स्यूडोमोनास : -  एक जीवाणु जो अन्य कवक को खाता है।   उपयोग : - करपा, भूरी, डाउनी, मिट्टी के कवक के लिए सर्वश्रेष्ठ।   3 एंपिलोमासीन :- एक कवक जो अन्य कवक को खाता है।   उपयोग : - करपा, भूरी सभी फसलों पर ...

समसामयिक सलाह:- मौसम आधारित किसानों को कृषि सलाह

  समसामयिक सलाह :- मौसम आधारित किसानों को कृषि सलाह रबी मौसम में होने वाली प्रमुख फसल गेंहू, अरहर, चना, सरसों, अलसी और सूरजमुखी फसलों में कीटों से बचाव, उचित देखभाल और भरपूर पैदावार के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने समसामयिक सलाह दी है। कृषि संचालनालय रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ■ रबी मौसम में गंेहू फसल की बुआई के 20 से 25 दिन के बाद पहली सिंचाई करें। पहली सिंचाई के समय में नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा का टापड्रेसिंग करें। ■ गेंहू फसल में दूसरी सिंचाई कल्ले निकलने की अवस्था में बुआई के लगभग 40 से 50 दिन के बाद करें और इस समय नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा का टाप ड्रेसिंग करें।  ■अरहर में फल बनने की अवस्था में फलभेदक कीटों के नियंत्रण के लिए इंडोंक्साकार्ब दवाई 300 ग्राम 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। चना की फसल जब 15 से 20 सेंटिमीटर की ऊचाई होने पर खुटाई करें।  ■चना फसल में बुआई के 40 से 45 दिन के बाद में पहला सिंचाई करें। फसल में यदि कालरराट रोग दिखाई दे तो सिचाई स्प्रिंकलर से करने की सलाह दी गई है। ■ सरसों की फसल में पहली सिचाई बुआई ...

कृषि सलाह:-फलदार वृक्षों को रोगों से बचाये अपने घर पर बोर्डो पेस्ट बनाएं।

  कृषि सलाह:-फलदार वृक्षों को रोगों से बचाये अपने घर पर बोर्डो पेस्ट बनाएं। आवश्यक सामग्री - 1. नीला थोथा (Copper sulphate) - एक किलोग्राम 2. चुना (बुझा हुआ) - एक किलोग्राम । 3. तीन बाल्टी (प्लास्टिक के) । 4. 10 लीटर पानी । बोर्डो पेस्ट तैयार करने की विधि - ● सबसे पहले तो आप बोर्डो पेस्ट बनाने के एक दिन पहले शाम को 1 किग्रा. नीला थोथा (Copper sulphate) को एक प्लास्टिक की बाल्टी में 5 लीटर पानी में घोलकर या डुबाकर रख दें । क्योंकि नीला थोथा अच्छी तरह घुलने में अधिक समय लेता है । ● अब जब अगले दिन जब आप बोर्डो पेस्ट तैयार कर रहे हो उस समय 1 किग्रा. चुना (slaked lime)को एक दूसरी प्लास्टिक की बाल्टी के 5 लीटर पानी मे अच्छी तरह घोल लीजिए । ● अब आपके पास दो अलग - अलग प्लास्टिक की बाल्टी में एक-एक किग्रा . चुना और नीला थोथा 5 -5 लीटर पानी मे घुला हुआ है । ● अब आप एक लोहे की साफ छड़ या कोई भी लोहे की चीज लेकर नीला थोथा वाले घोल में लगभग 20 से 25 सेकेंड तक आधा डूबकर रखिये । अब जब आप इसे डुबाकर निकालेंगे तो देखेंगे कि...