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राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत धान का बोनस, धान के बदले अन्य फसल का लाभ कितना मिला है अपने मोबाइल पर देख सकते हैं

राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत धान का बोनस, धान के बदले अन्य फसल का लाभ कितना मिला है किसान भाई अपने मोबाइल पर देख सकते हैं । मोबाइल पर निम्न प्रोसेस करें -  1. https://kisan.cg.nic.in/   पर क्लिक करे या सीधे एकीकृत किसान पोर्टल Google में सर्च करे। 2. एकीकृत किसान पोर्टल का पेज खुलेगा, उसमें *कृषक एवं भुगतान विवरण को क्लिक करें 3. उसके बाद किसान संबंधी जानकारी पेज खुलेगा उसमें धान पंजीयन किसान कोड या UF iD या  आधार नंबर डालकर जानकारी देखें मैं क्लिक करेंl  अब किसान की जानकारी भुगतान की जानकारी भूमि का विवरण फसल विवरण देख सकते हैं l https://kisan.cg.nic.in/#/homepage

जामुन के गुण काफी अधिक है।

 जामुन के गुण काफी अधिक है। भारत को जम्बू द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम जामुन के वजह से है।आश्चर्य की बात तो है कि किसी फल के वजह से किसी देश का नामकरण किया गया ! दरअसल जामुन के कई नाम है और उन्हीं में से एक नाम है जम्बू ।  भारत में जामुन की बहुतायत रही है । हमारे देश में इसकी पेड़ों की संख्या लाखों-करोड़ों में है और शायद इसी कारण से यह फल हमारे देश का पहचान बन गया। भारतीय माइथोलॉजी के दो प्रमुख केंद्र रामायण और महाभारत में भी यह विशेष पात्र रहा है।भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में मुख्य रूप से जामुन का ही सेवन किया था वहीं श्री कृष्णा के शरीर के रंग को ही जामुनी कहा गया है। संस्कृत के श्लोकों में अक्सर इस नाम का उच्चारण आता है। जामुन विशुद्ध रूप से भारतीय फल है।भारत का हर गली - मोहल्ला ईसके स्वाद से परीचित हैं। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है. जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर क...

खरीफ बीज दर:-इन दरों पर उपलब्ध होगा खरीफ वर्ष 2023-24 में कृषको को बीज

खरीफ बीज दर :- इन दरों पर उपलब्ध होगा खरीफ वर्ष 2023-24  में छत्तीसगढ़ के कृषकों को बीज बीज खेती की नींव का आधार और मूलमंत्र है। अत: अच्छी गुणवत्ता वाले बीज से, फसलों का भरपूर उत्पादन प्राप्त होता है। कृषक बन्धु जानते है , कि उत्तम गुणवत्ता वाला बीज सामान्य बीज की अपेक्षा 20 से 25 प्रतिशत अधिक कृषि उपज देता है। अत:शुध्द एवं स्वस्थ "प्रमाणित बीज" अच्छी पैदावार का आधार होता है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (छ. ग. शासन का उपक्रम) बीज भवन जी ई रोड तेलीबांधा ने जारी की खरीफ वर्ष 2023-24 में अनाज,दलहन एवं तिलहन बीजो की विक्रय दर जो कि निम्नानुसार है।

महुआ : एक कल्पवृक्ष जो इंसान समेत पृथ्वी के अन्य प्राणियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं!

महुआ के फूल , सुंदर, और मीठी सुंगंध वाले , जब पुष्पित होते हैं तो वातावरण में नशीली खुशबू छा जाती है। मधुक अर्थात महुआ, आम आदमी का पुष्प और फल दोनों हैं। आम आदमी का फल होने के कारण यह जंगली हो गया, और जंगल के प्राणियों का भरपूर पोषण किया। आज के  शहरी लोग इसे आदिवासियों का अन्न कहते हैं। सच तो यह है कि गांव में बसने वालों उन लोगों के जिनके यहां महुआ के पेड़ है, बैसाख और जेठ के महीने में इसके फूल नाश्ता और भोजन हैं।  पांचवे दशक में महुआ ग्रामीण जन-जीवन का आधार होता था। प्रत्येक घर में शाम को महुआ के सूखे-फूल को धो-साफ कर चूल्हों में कंडा-उपरी की मंद आंच में पकाने के लिए रख देते थे। रातभर वह पकता,पक कर छुहारे की तरह हो जाता। ठंडा हो जाने पर उसे दही, दूध के साथ खाने का आनन्द अनिर्वचनीय होता। कुछ लोग आधा पकने पर कच्चे आम को छीलकर उसी में पकने के लिए डाल देते। वह खटमिट्ठा स्वाद याद आते ही आज भी मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन न वे पकाने वाली दादियां रहीं न, माताएं अब तो सिर्फ उस मिठास की यादें भर शेष हैं। इसे डोभरी कहते, इसे खाकर पटौंहा में कथरी बिछाकर जेठ के घाम को चुनौती दी जाती थी...

हजारों साल पुराना है, रागी फसल का इतिहास, खेती से मिलेगा जेन्जरा के किसान मेघावी साहू को धान की अपेक्षा दुगना मुनाफा।

हजारों साल पुराना है, रागी फसल का इतिहास, खेती से मिलेगा जेन्जरा के किसान मेघावी साहू को धान की अपेक्षा दुगना मुनाफा। रागी को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल माना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा है, अमीनो एसिड, कैल्शियम, पौटेशियम की मात्रा रागी भी काफी पाई जाती है. कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्ति के लिए रागी का सेवन करना बेहद फायदेमंद है। खेती-किसानी में मुनाफे वाली फसलों की खेती करने के लिए किसानों को राज्य शासन एवं केंद्र शासन द्वारा लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन्हीं में से लघु धान्य फसल रागी एक ऐसी फसल हैं, जिनका हजारों साल पुराना इतिहास हैं।  माना जाता है कि इसकी खेती भारत में 4 हजार साल पहले शुरू हुई थी।इस फसल की बुवाई की सबसे पहले अफ्रीका में हुई थी।  हमारे पूर्वज इसकी खेती करते थे बीच मे कृषकों का रुझान धान/गेंहू की फसलों पर गया और लघु धान्य वाली फसल रागी खेत से व भोजन की थाली से गायब हो गयी। परंतु अब शासन के लगातार प्रचार प्रसार के कारण कृषको ने अपने खेतों में रागी को स्थान देना शुरू कर दिया है। ग्राम जेन्जरा विकासखंड फिंगेश्वर जिला गरियाबंद के कृषक मेधावी सा...

आमा हल्दी -बहुत गुणकारी है आमा हल्दी

आमा हल्दी - बहुत गुणकारी है आमा हल्दी   Botanical Name:-  Curcuma amada Roxb.  Family :- Zingiberaceae  अंग्रेज़ी नाम : Mango ginger (मैंगो जिंजर)  हिन्दी-आमा हलदी,  परिचय भारत के समस्त प्रान्तों में इसकी खेती की जाती है। इसके गाँठे आम की तरह गन्धयुक्त होती हैं इसलिए इसे आमा हल्दी कहते हैं। लोग इसकी गाँठों के छोटे-छोटे टुकड़े करके सुखा लेते हैं। प्राय बाजार में आमा हल्दी के नाम से वन्यहरिद्रा की गाँठें बिकती हैं। इसका उपयोग हलदी के स्थान पर किया जाता है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि में प्रयोग किया जाता है। मिठाईयों में आम की गन्ध लाने के लिए इसके फाण्ट का उपयोग किया जाता है। इसके प्रकन्द बृहत्, स्थूल, बेलनाकार अथवा दीर्घवृत्ताकार, शाखा-प्रशाखायुक्त होते हैं। आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव प्रकन्द अजीर्ण, जीर्ण व्रण, त्वक् रोग, श्वासनलिका शोथ, वातरक्त, विबन्ध, अतिसार, जीर्ण पूयमेह, कटिशूल, मुखरोग तथा कर्णरोग में हितकर है। यह वातानुलोमक, शीतल, सुगन्धित, दीपन एवं पाचक है। औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि दंतशूल-अकारकरभ, तुत्थ, अफीम तथा आम्रंधी हरिद्रा के चू...

मिलेट्स:- कोदो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है।

मिलेट्स:- कोदो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। महज 50 साल पहले हमारा फूड कल्चर बिल्कुल अलग था ।हम सभी मोटे अनाज खाने वाले लोग थे। हरित क्रांति के उपरांत हम सभी ने चावल और गेहूं को इस कदर अपनाया कि हमारी थाली से मोटे अनाज गायब हो गए।  छत्तीसगढ़ में 50 साल पहले इसकी खेती वृहत स्तर पर की जाती थी परंतु दिन ब दिन इसकी घटती मांग से कोदो की खेती का रकबा काफी कम होता चला गया। परन्तु हाल के दिनों में पौष्टिकता से भरपूर ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ), सवां, कोदों और इसी तरह के अन्य मोटे अनाजों वैश्विक बाजार में डिमांड बढ़ने लगी है। हम सभी लोगों को इन मोटे अनाजों के बारे में जन-जन तक जानकारी पहुंचानी चाहिए। #कोदो कोदो एक मोटा अनाज है जो कम वर्षा में भी पैदा हो जाता है। नेपाल व भारत के विभिन्न भागों में इसकी खेती की जाती है। धान आदि के कारण इसकी खेती अब कम होती जा रही है। इसका पौधा धान या बडी़ घास के आकार का होता है। इसकी फसल पहली बर्षा होते ही बो दी जाती है और भादों में तैयार हो जाती है। इसके लिये बढि़या भूमि या अधिक परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती।  अधिक पकने पर इसके दाने झड़कर खेत में गिर जा...